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त्रिदिवसीय योग साधना शिविर का समापन:आचार्य परमेश्वरानन्द अवधूत बोले- आत्मा की खोज के लिए आध्यात्मिक साधना ही एकमात्र मार्ग




रायपुर में आनन्द मार्ग प्रचारक संघ के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय योग साधना शिविर और सेमिनार का समापन हुआ। समापन सत्र में आनन्द मार्ग के वरिष्ठ पुरोधा आचार्य परमेश्वरानन्द अवधूत ने “आत्म तीर्थ” विषय पर सारगर्भित प्रवचन दिया। आचार्य परमेश्वरानन्द अवधूत ने तंत्र में वर्णित शिवोक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि मनुष्य बाहरी तीर्थों की यात्रा में समय और धन खर्च करता है, जबकि वास्तविक तीर्थ उसके भीतर स्थित आत्मा है। उन्होंने कहा कि आत्मा की खोज के लिए आध्यात्मिक साधना ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने भगवान आनन्द मूर्ति के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि सत्यलोक में प्रतिष्ठित होना साधक का लक्ष्य है। इसके लिए योग्य गुरु से दीक्षा लेकर यम-नियम का पालन करते हुए निरंतर साधना करना आवश्यक है। प्रउत दर्शन पर रखा व्याख्यान सेमिनार के दूसरे दिन आचार्य रितेश्वरानन्द अवधूत ने प्रउत (प्रगतिशील उपयोग तत्व) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि यह प्रभात रंजन सरकार की ओर से प्रतिपादित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दर्शन है। ‘पांच न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति जरूरी’ उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य की पांच न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होगी, तब तक वह आध्यात्मिक साधना का पालन नहीं कर सकता। मानव जीवन का लक्ष्य “आत्म मोक्षार्थं जगत हिताय च” है, अर्थात आत्मा की मुक्ति और जगत की सेवा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के माध्यम से न्यूनतम आवश्यकताओं की गारंटी मिलनी चाहिए। संतुलित आर्थिक व्यवस्था पर दिया जोर आचार्य रितेश्वरानन्द अवधूत ने कहा कि वर्तमान में विश्व के किसी भी देश में संतुलित आर्थिक व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सामाजिक-आर्थिक शोषण बढ़ रहा है। उन्होंने प्रउत दर्शन के अनुसार कृषि, कृषि आधारित उद्योग, गैर-कृषि उद्योग, सामान्य व्यवसाय, बौद्धिक और नौकरीपेशा वर्ग के बीच जनसंख्या के संतुलित वितरण की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि इससे किसी एक क्षेत्र पर दबाव नहीं पड़ेगा और बेरोजगारी, भुखमरी, आर्थिक असमानता को कम किया जा सकेगा। संस्थागत गतिविधियों की दी जानकारी सेमिनार के अंतिम सत्र में आचार्य परमेश्वरानन्द अवधूत ने संगठन की संरचना और विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही सभी अनुयायियों को आगामी छह माह के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए। 200 से अधिक साधकों ने लिया भाग इस त्रिदिवसीय सेमिनार में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से 200 से अधिक साधकों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।



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