![]()
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में एक बार फिर से नन्हे हाथी की मौत हो गई। डेम के दलदल वाले क्षेत्र मंे फंसने के बाद हाथी शावक बाहर नहीं निकल सका और उसकी जान चले गई। सुबह मौके पर जाने के बाद इसकी जानकारी हुई और आगे की प्रक्रिया वन अमला द्वारा की गई। मामला छाल रेंज का है। मिली जानकारी के मुताबिक धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज के तरकेला गांव के केराझरिया जंगल क्षेत्र में 35 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। जहां रविवार की रात को यह दल डेम में पानी पीने या नहाने के लिए पहुंचा। इसी दौरान एक 4 से 10 माह का हाथी शावक डेम के दलदल की ओर चले गया और बाहर नहीं निकल सका। ऐसे में रात में हाथियों ने तेज चिंघाड़ शुरू कर दी। हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज दूर तक सूनी जा रही थी। ऐसे में हाथी मिल दल को इसकी जानकारी लगी, लेकिन रात में वहां जाना संभव नहीं था। ऐसे में सुबह होते ही किसी अनहोनी की आशंका को लेकर वनकर्मी और हाथी मित्र दल के सदस्य मौके पर पहुंचे। जहां देखा गया कि डेम के दलदल में एक हाथी शावक की फंसने से मौत हो गई है। इसके बाद मामले की जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को दी गई।
आगे की प्रक्रिया पूरी की गई
जहां डीएफओ, एसडीओ, रेंजर समेत मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि अभी भी पास ही हाथियों का दल विचरण कर रहा है। हांलाकि विभाग के अधिकारियों के द्वारा तत्काल शव को बाहर निकलवाया गया और पंचनामा व पोस्टमार्टम के बाद उसे दफनाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
4 दिन पहले घोघरा डेम में हुई मौत
इससे पहले छाल रेंज के घोघरा डेम में एक हाथी शावक की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। उस दौरान 20 हाथियों का दल था, जो पानी में नहाने या पानी पीने उतरा था। तभी यह घटना घटित हुई थी। ऐसे में 4 दिनों में 2 हाथी शावक की मौत हो गई। 35 हाथियों के दल में 4 नर, 25 मादा और 6 शावक शामिल थे। रात में जाना संभव नहीं
इस संबंध में छाल रेंजर राजेश चौहान ने बताया कि रात में हाथियों के चिंघाड़ने की जानकारी मिली थी, पर वहां तक पहुंचना मुश्किल था। सुबह घटना की जानकारी हुई। बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की गई है। लगातार हाथियों की निगरानी की जा रही है। उनके मुवमेंट की जानकारी होने के बाद प्रभावित क्षेत्र के गांव में भी मुनादी कराया जा रहा था। ताकि कोई घटना घटित न हो सके।
<
