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जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के बजट की बर्बादी का हैरान करने वाला मामला बचेली में सामने आया है। यहां जिस जगह पर एनएमडीसी का जहरीली लाल मिट्टी (टेलिंग) वाला पुराना बांध है, प्रशासन ने ठीक उसके नीचे 49 लाख रुपए की लागत से तालाब खोद दिया। अब 5 साल बाद उसी तालाब को मिट्टी और मलबे से पाटा जा रहा है। वजह यह है कि पास ही स्थित टेलिंग डैम कमजोर हो गया है और उसमें दरारें आने लगी हैं। प्रशासन को डर है कि तालाब में पानी भरने से डैम पर दबाव बढ़ेगा और वह किसी भी वक्त टूट सकता है। बचेली ट्रक यूनियन पार्किंग स्टैंड के पास करीब 5 साल पहले वन विभाग ने इस तालाब का निर्माण कराया था। इसके लिए डीएमएफ मद से 49 लाख रुपए जारी हुए थे। लगभग 8 हजार वर्ग मीटर में फैले इस तालाब का मकसद जल संरक्षण था। हर साल बारिश में यह लबालब भर जाता था। वन विभाग ने किया था निर्माण, इसे पाटने एनएमडीसी ने मंजूरी तक नहीं ली तालाब खोदने की अनुमति किसने दी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तालाब की खुदाई हो रही थी तब इंजीनियरों और अधिकारियों ने यह क्यों नहीं देखा कि इसके ठीक ऊपर एनएमडीसी का टेलिंग डैम है। यह डैम 1975-80 के दशक का है और काफी पुराना हो चुका है। अगस्त 2025 की बारिश में इस डैम का एक हिस्सा धंस गया था। किरंदुल जैसा हादसा होने का खतरा
स्थानीय लोग भी अफसरों की इस लापरवाही से डरे हुए हैं। 2024 में किरंदुल में एनएमडीसी का टेलिंग डैम टूटने से भारी तबाही मची थी। तब 200 से ज्यादा घरों में जहरीला लाल मलबा भर गया था। बचेली के लोगों का कहना है कि अगर डैम कमजोर है तो उसकी मरम्मत की जानी चाहिए। तीन बड़े सवाल, जवाब जरूरी… तालाब को पाटने के बारे में विभाग को कोई सूचना या आवेदन नहीं मिला है। हमने वन कर्मियों को मौके पर भेजा था। अगर बिना अनुमति के रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर यह काम हो रहा है तो जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। – प्रीतेश पांडेय, रेंजर, बचेली तालाब की वजह से बांध में पहले ही कई जगह से सीपेज हो रहा है। आगे चलकर कोई बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है। यही कारण है कि तालाब को पाटना पड़ रहा है। इसका निर्माण ही गलत जगह पर किया गया था। – देवेश ध्रुव, कलेक्टर, दंतेवाड़ा
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