मामला रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी सुब्रत दास (परिवादी) का है। उन्होंने अपनी पत्नी कमला दास और माया कश्यप के खिलाफ निचली अदालत में परिवाद दायर किया थ …और पढ़ें

HighLights
- पारिवारिक विवाद को आपराधिक रूप देने की कोशिश नाकाम
- रिटायर्ड रेलकर्मी की पत्नी के खिलाफ दायर याचिका हुई खारिज
- संयुक्त खाते से पैसे ट्रांसफर करने पर पत्नी को मिली क्लीन चिट
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम) लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी संयुक्त बैंक खाते का संचालन दोनों में से कोई भी (Either or Survivor) मोड पर है, तो किसी भी खाताधारक द्वारा राशि निकालना प्रथम दृष्टया चोरी, आपराधिक न्यासभंग या धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए पति द्वारा दायर दांडिक पुनरीक्षण याचिका को सारहीन मानकर खारिज कर दिया।
रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी ने लगाया था पत्नी पर आरोप
मामला रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी सुब्रत दास (परिवादी) का है। उन्होंने अपनी पत्नी कमला दास और माया कश्यप के खिलाफ निचली अदालत में परिवाद दायर किया था। सुब्रत दास का आरोप था कि मार्च और जुलाई 2024 में अनावेदकों ने उनके किराए के मकान में आकर मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
पेंशन खाते से 15 लाख ट्रांसफर करने का था विवाद
साथ ही एक जून 2024 को पत्नी ने गाड़ी की चाबी व मोबाइल चुरा लिया और एसबीआई चितली चौक शाखा के संयुक्त खाते से उनके रिटायरमेंट के 15 लाख रुपये निकालकर अपने व्यक्तिगत एकल खाते में ट्रांसफर कर फिक्स डिपॉजिट करा लिए।
कोर्ट ने पकड़ा अवैध संबंध व पारिवारिक विवाद का एंगल
मामले की गहराई से जांच और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि परिवादी (पति) और उत्तरवादी क्रमांक-1 (पत्नी) के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है। संपूर्ण परिवाद से यह बात सामने आई कि पत्नी और ससुराल पक्ष को यह आशंका थी कि सुब्रत दास का किसी महिला के साथ संबंध है। इसी बात को लेकर घर में लगातार वाद-विवाद और लड़ाई-झगड़ा होता था। इसके अलावा पत्नी द्वारा परिवार न्यायालय में भरण-पोषण का दावा भी प्रस्तुत किया गया है।
बैंक नियमों और विरोधाभासों के आधार पर याचिका खारिज
- बैंक की नियमावली: बैंक द्वारा कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, उक्त संयुक्त खाते का संचालन दोनों में से कोई भी कर सकता था। इसलिए पत्नी कानूनी रूप से पैसे निकालने के लिए अधिकृत थी।
- बयानों में विरोधाभास: परिवादी ने मार्च 2024 में मारपीट का आरोप लगाया था, लेकिन सात मार्च 2024 को पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में ऐसी किसी मारपीट का कोई उल्लेख नहीं था।
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पारिवारिक विवाद को आपराधिक रूप देने का प्रयास
न्यायालय ने कहा कि यह पूरी तरह से पति-पत्नी के बीच का पारिवारिक विवाद है, जिसे आपराधिक रूप देने का प्रयास किया गया। अतः न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बिलासपुर द्वारा 23 अक्टूबर 2025 को पति के परिवाद को खारिज करने का फैसला बिल्कुल न्यायसंगत था। कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया।
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