बस्तर में संचार नेटवर्क के विस्तार ने माओवादी हिंसा पर नियंत्रण और विकास को नई दिशा दी है। …और पढ़ें

HighLights
- 150 से अधिक पुलिस कैंप पहले ही स्थापित
- 848 गांवों में BSNL का 4G नेटवर्क पहुंचा
- 5000 नए टावर लगाने की योजना अंतिम चरण
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राज्य में माओवादी हिंसा के खिलाफ जारी अभियान में संचार नेटवर्क एक अहम हथियार बनकर उभरा है। विशेष रूप से बस्तर के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों के दौरान 3,500 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इससे जहां ग्रामीणों को डिजिटल दुनिया से जुड़ने का अवसर मिला है, वहीं सुरक्षा बलों की रणनीति भी अधिक प्रभावी हुई है। अब राज्य में 5,000 नए मोबाइल टावर लगाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
दूरदराज क्षेत्रों में बढ़ी कनेक्टिविटी
सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहले जिन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बेहद सीमित था, वहां अब फोर-जी नेटवर्क सक्रिय हो चुका है। इससे माओवादी गतिविधियों पर नजर रखना और त्वरित कार्रवाई करना आसान हुआ है। खुफिया सूचनाएं समय पर मिलने से सुरक्षा बलों को अभियानों में सफलता मिल रही है और माओवादियों को निष्क्रिय करने में मदद मिली है।
कैंपों के आसपास नेटवर्क अनिवार्य
बस्तर क्षेत्र में अब तक 150 से अधिक पुलिस कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। इन कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। ‘नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव)’ योजना के तहत इन कैंपों से जुड़े गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ मोबाइल कनेक्टिविटी भी पहुंचाई जा रही है।
BSNL और जियो का विस्तार
सरकारी और निजी कंपनियों के सहयोग से संचार नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। बीएसएनएल के माध्यम से 848 गांवों में 4G नेटवर्क पहुंच चुका है, जबकि जियो की सेवाएं इससे तीन गुना अधिक क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। इससे दशकों से विकास से वंचित गांवों में इंटरनेट सेवाएं सुलभ हुई हैं।
ई-गवर्नेंस से बदली तस्वीर
मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से ग्रामीणों को ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इससे सरकारी योजनाओं की पहुंच सीधे हितग्राहियों तक सुनिश्चित हुई है। आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा संभाग के दुर्गम क्षेत्रों में 5,000 नए टावर और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिससे संचार व्यवस्था और मजबूत होगी।
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