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सरकारी जमीन निजी बताकर बेचने के आरोपित को हाई कोर्ट से राहत नहीं

सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने के आरोपित को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। बिलासपुर के गुलमोहर पार्क निवासी आरोपी श्रेयांशु ने खुद को केवल बिक्री विलेख का सत्यापनकर्ता गवाह बताया था। डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध में उसकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। मामला सरकंडा थाने में दर्ज अपराध से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता कौशल्या थवैत ने आरोप लगाया कि उसने खमतराई स्थित प्लाट नंबर 17/25, खसरा नंबर 559/1/थ/6, 1500 वर्गफीट जमीन नसीम अहमद के माध्यम से मूल विक्रेता विश्वनाथ राय से 30 मार्च 2022 को 18.75 लाख रुपये में खरीदी थी।

बाद में नामांतरण के लिए आवेदन करने पर एसडीओ ने इसे खारिज कर दिया। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन ‘बड़े झाड़ का जंगल’ दर्ज होने के कारण कलेक्टर की अनुमति के बिना इसकी बिक्री नहीं की जा सकती थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि इसके बावजूद जमीन को निजी बताकर बिक्री विलेख कराया गया और उससे रकम ली गई।

पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपित ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने एफआईआर और आरोपपत्र के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया जमीन ‘बड़े झाड़ का जंगल’ के रूप में दर्ज है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी विवाद में दीवानी उपाय उपलब्ध होना अपने आप आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाने का आधार नहीं है। यदि एफआईआर और जांच में संज्ञेय अपराध के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टा सामने आते हैं, तो जांच को केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि विवाद दीवानी प्रकृति का भी है।

इसी कारण डिवीजन बेंच ने श्रेयांशु कौशिक की एफआईआर और 19 अप्रैल 2026 के आरोपपत्र को रद्द करने की मांग खारिज कर दी।

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