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तस्वीर सेंट्रल यूनिवर्सिटी कैंपस और आसपास के क्षेत्र की है। फाइलों के मुताबिक 2023-24 में यहां 17 एकड़ (7 हेक्टेयर) में 7700 पौधे लगाए गए थे। इनमें ‘दहमन’, ‘कुल्लू’, ‘भेलवा’, ‘महुआ’ और ‘नीम’ जैसे दुर्लभ पौधों की लंबी सूची दर्ज है। लेकिन हकीकत में ऐसा लगता है कि यहां कभी पौधरोपण हुआ ही नहीं, बल्कि ‘घास-फूस संवर्धन कार्यक्रम’ चला। वन विभाग, यूनिवर्सिटी के वानिकी विभाग और टीएफआरआई जबलपुर के इस त्रिकोणीय सहयोग के बावजूद जमीन पर हरियाली नहीं दिख रही। सवाल ये है कि आखिर 7700 पौधे कहां गए? क्या वे फाइलों के पन्नों में ही सूख गए? वन विभाग को लीज पर दी है जमीन
सीयू के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि पौधरोपण के लिए जमीन वन विभाग को लीज पर दी गई है। इसकी देखरेख, सुरक्षा और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की है। विभाग द्वारा वहां गार्ड भी तैनात किए गए हैं तथा सिंचाई सहित अन्य व्यवस्थाएं भी वही देख रहा है। बारिश में दोबारा लगाएंगे पौधे
वन विभाग ने बताया कि यूनिवर्सिटी से पौधों के सूखने और नष्ट होने की सूचना मिली थी। इसके बाद वन कर्मियों को मौके पर भेजकर सफाई करवाई गई। बचे हुए पौधों की सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं, वहीं सूख चुके पौधों को बारिश में दोबारा लगाने की तैयारी करने को कहा गया है।
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