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भास्कर न्यूज | बालोद अधिकतम व न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा होने से जिले में पिछले तीन दिन से हीट वेव (लू) की स्थिति है। तेज धूप के बीच गर्मी व उमस का सामना सिर्फ आम लोगों ही नहीं बल्कि जंगल में वन्य प्राणियों को भी करना पड़ रहा है। गर्मी से राहत पाने आम लोग अपने स्तर पर तमाम इंतजाम कर लेते हैं लेकिन वन्य प्राणी भटकते रहते है क्योंकि गर्मी की वजह से बांध, नहर नाली सूख जाते है। इसी को ध्यान में रखकर वन विभाग की ओर से वन्य प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था किया गया है। पुराने व नए डबरी में हर सप्ताह या दो-तीन दिन के अंतराल में टैंकर, बोर के माध्यम से पानी डाल रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कई डबरी में मानसून सीजन में हुई बारिश का पानी अब तक भरा हुआ है। वहीं तेज गर्मी में खपत बढ़ने की वजह से कई डबरी में रोजाना पानी डालने की नौबत आ रही है। वन विभाग के अनुसार जिले के जंगल में सबसे ज्यादा नीलगाय है। दल्लीराजहरा, गुरूर, बालोद, डौंडीलोहारा, डौंडी ब्लॉक के जंगल क्षेत्र में जंगली सुअर, बंदर, भालू, हिरण, तेंदुआ, मोर, सांभर, कोटरी, खरगोश, गिलहरी, तोता सहित अन्य पशु, पक्षी है। जिले में 812 वर्ग किमी के दायरे में फैला है जंगल वन विभाग के अनुसार जिले में लगभग 812 वर्ग किमी का हिस्सा जंगल क्षेत्र है। जहां वन्य प्राणी, पशु, पक्षियां रहते हैं। वन्य प्राणियों की प्यास बुझाने के लिए वर्तमान मंे लगभग 110 डबरी(छोटे व बड़े) में पानी भरा है। हर सप्ताह या 4 दिन के अंतराल में टैंकर के माध्यम से पानी डाल रहे है। एक टैंकर में 3500 लीटर पानी भरा रहता है, जिसे डबरी में डालते है। जिसकी खपत न्यूनतम एक सप्ताह से अधिकतम दो सप्ताह में होती है। एक सप्ताह में औसतन डेढ़ से दो लाख लीटर पानी की खपत हो रही है।
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