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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की 515 नवगठित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया। उन्होंने इसे किसानों के लिए बड़ी पहल बताते हुए कहा कि सहकारिता के जरिए गांवों तक सुविधाएं पहुंचाने का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। नई 515 समितियों में से बस्तर और सरगुजा 197 आदिवासी क्षेत्रों में बनाई गई हैं। अब इन्हें दुग्ध उत्पादन व मत्स्य पालन से जोड़ने की तैयारी है। साथ ही यहां लोक सेवा केंद्र शुरू की जाएंगी। इससे लोगों को 25 से अधिक सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन समितियों के जरिए किसानों को अब गांव के पास ही खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही धान खरीदी की प्रक्रिया भी आसान होगी। किसान नजदीकी समिति में ही अपनी उपज बेच सकेंगे। इनमें माइक्रो एटीएम की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे किसान 20 हजार रुपए तक की राशि निकाल सकते हैं। इस अवसर पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता सहित किसान और अधिकारी मौजूद रहे। दुर्ग संभाग में सबसे अधिक समितियां, यहीं 227 बढ़ीं
सहकारी समितियों के मामले में दुर्ग संभाग पहले नंबर पर हैं। यहां पहले से 533 समितियां थीं। यह संख्या किसी भी संभाग में ज्यादा थीं। अब फिर से वहां 227 नई समितियां भी बनाई गईं हैं। वृद्धि के मामले में भी दुर्ग संभाग आगे है। अब इस संभाग में समितियों की संख्या 760 हो गई है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके बाद रायपुर संभाग की बारी आती है। रायपुर में 124 समितियां बढ़ी हैं। रायपुर संभाग में समितियों की संख्या 650 हो गई हैं। बस्तर संभाग में सिर्फ 39 नई समितियां बनी हैं, जो वृद्धि के मामले में सबसे पीछे है। समितियों से किसानों को इस तरह के फायदे
गांव में ही फसल ऋण और अन्य कर्ज {खाद-बीज और कीटनाशक एक ही जगह {माइक्रो-एटीएम से बैंकिंग सुविधा {जन औषधि केंद्र से सस्ती दवाएं {गांव में गोदाम, बेहतर भंडारण। खुद ही नजदीकी समितियों में जुड़े जाएंगे किसान
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक में प्रबंधक अभिषेक तिवारी ने बताया कि नई समितियां से जुड़ने के लिए किसानों को कुछ नहीं करना है। सिस्टम ऐसा बना है कि वे खुद नजदीकी समिति से जुड़ जाएंगे। नई समितियां बुधवार से कार्यशील हो गई हैं। सभी समितियां अब लोन इत्यादि बांटने के लिए तैयार हैं। जल्दी ही यहां से किसानों को लोन, खाद और बीज सहित सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी।
-सावित्री भगत, अपर संचालक सहकारिता विभाग 32 लाख किसान रजिस्टर्ड, लोन लेने वाले सिर्फ 15.52 लाख प्रदेश में सहकारी समितियों से जुड़े 32 लाख किसानों में से हर साल आधे से भी कम, करीब 15.52 लाख किसान ही कर्ज ले पा रहे थे। वजह- ज्यादातर समितियां गांवों से इतनी दूर थीं कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए वहां तक पहुंचना आसान नहीं था। खाद-बीज या लोन के लिए उन्हें या तो निजी दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता था या फिर महंगे ब्याज पर उधार लेना पड़ता था। प्रदेश में 515 नई समितियों के बनने से किसानों की यह दिक्कतें कुछ हद तक दूर होंगी। अब प्रदेश में कुल समितियों की संख्या 2573 हो गईं हैं। नई समितियां बनने से किसानों को कर्ज, खाद-बीज और दूसरी सुविधाएं लेने में आसानी होगी। पहले एक समिति से औसतन 1555 किसान जुड़े थे। अब यह संख्या घटकर करीब 1243 रह गई है।
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