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राजधानी समेत पूरे प्रदेश में आपातकालीन सेवाएं (108 और 112) वेंटिलेटर पर हैं। विडंबना यह है कि दोनों सेवाओं की 775 नई गाड़ियां उद्घाटन और स्टाफ की कमी के कारण यार्ड में धूल फांक रही हैं, वहीं दूसरी ओर जनता को पुरानी, खटारा गाड़ियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। दोनों सेवाओं का संचालन जीवीके के पास होने से अब व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 108 सेवा की 375 नई एंबुलेंस भी अलग-अलग थाना क्षेत्रों और अस्पताल परिसरों में खड़ी हैं, जबकि पुरानी और जर्जर गाड़ियां अब भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। वहीं, 2023 में 112 के लिए खरीदी गई गाड़ियों को प्रदेशभर के थानों में भेजा गया था। रायपुर पुलिस को इनमें से 18 वाहन मिले थे, जिन्हें बड़े थानों के टीआई और डीएसपी को आवंटित किया गया। शुरुआत में नई गाड़ियां मिलने से अधिकारी उत्साहित थे, लेकिन कुछ समय बाद इनमें तकनीकी खराबियां आने लगीं। कई बार अधिकारी ड्यूटी पर समय से नहीं पहुंच पाए और रास्ते में दूसरे वाहनों से लिफ्ट लेनी पड़ी। ऐसा हो रहा… सिस्टम की सुस्ती, भारी पड़ी जान पर: 3 मई को रिंग रोड नंबर-1 पर हुए हादसे में डायल-112 तो 10 मिनट में पहुंच गई, पर एंबुलेंस 25 मिनट तक नहीं आई। अंततः घायल युवती को पुलिस वाहन से ही अस्पताल ले जाना पड़ा। यार्ड में इमरजेंसी… इस तरह एंबुलेंस सेवा 108 और डायल 112 के वाहन 6 महीनों से खड़े हुए हैं… 108 एंबुलेंस: नई गाड़ियां हैं, पर चलाने वाले नहीं जीवीके को 108 सेवा के लिए 375 नई एंबुलेंस मिली हैं। इनमें से अधिकांश अलग-अलग थाना क्षेत्रों और अस्पताल परिसरों में खड़ी हैं, जबकि पुरानी और खराब गाड़ियां अब भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2019 में 3.28 लाख लोगों ने एंबुलेंस सेवा का उपयोग किया था, जो 2026 में बढ़कर 4.38 लाख पहुंच गया। नई खेप: 300 बीएलएस, 70 एएलएस, 5 नियोनेटल) थानों, अस्पतालों में खड़ी हैं। स्टाफ का टोटा: पुराने अनुभवी कर्मचारियों को हटाने के बाद नई भर्ती अधूरी है। पता लगा है कि रात में कई एंबुलेंस ऑफ रोड हो जाती हैं। जो गाड़ियां चल रही हैं, उनमें अब तक नंबर प्लेट भी नहीं लगी है। लोकेशन का संकट: नए स्टाफ को भौगोलिक जानकारी न होने से रिस्पॉन्स टाइम बढ़ रहा है। राजधानी का हाल: रायपुर की 24 नई एंबुलेंस में से अधिकांश खड़ी हैं। कालीबाड़ी में 3 गाड़ियों पर 1 ड्राइवर और पंडरी में 5 गाड़ियों पर महज 2 ड्राइवर तैनात हैं। डायल-112: पुरानी सड़कों पर, नई की सुध नहीं ले रहे डायल-112 की स्थिति और भी बदतर है। अगस्त 2023 में 40 करोड़ की लागत से खरीदी गई 400 गाड़ियां दो साल तक अमलेश्वर बटालियन में खड़ी-खड़ी खराब हो गईं। धूप और बारिश में खड़े रहने से कई गाड़ियों की बैटरी और टायर खराब हो गए। बाद में इन्हें जिला पुलिस को दे दिया गया और डायल-112 के लिए फिर नई गाड़ियां खरीदी गईं। लेकिन ये नई गाड़ियां भी पिछले छह महीने से उद्घाटन के इंतजार में यार्ड में खड़ी हैं। जानकारी के मुताबिक इनका लोकार्पण किसी वीआईपी से कराया जाना है, लेकिन अब तक कार्यक्रम तय नहीं हो पाया है। पुरानी गाड़ियों का जोखिम: अब भी पुरानी गाड़ियां संचालित हो रही हैं। इनके ड्राइवर जीवीके कंपनी के हैं, जबकि कंट्रोल रूम का संचालन सी-डैक कंपनी कर रही है। कई 5 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी हैं। आपात स्थिति में वाहन बीच रास्ते में बंद हो जाते हैं। कई बार धक्का देकर चालू करना पड़ता है। तकनीकी खामियां: पुलिस अधिकारियों को दी गई पुरानी गाड़ियां रास्ते में जवाब दे रही हैं, जिससे ड्यूटी प्रभावित हो रही है। सीधी बात – सत्यव्रत सिंह निना, जिला इंचार्ज, इमरजेंसी सेवा 108 सभी गाड़ियां क्यों नहीं चल रहीं, स्टाफ की कमी है?
-गाड़ियां संचालित हो रही हैं, अभी पूरा सेटअप तैयार किया जा रहा है। कंपनी लगातार स्टाफ की भर्ती कर रही है। समय पर गाड़ियां पीड़ितों तक क्यों नहीं पहुंच रहीं?
– एंबुलेंस समय पर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सीधी बात – गोपी चंद मेशराम, एएसपी, इमरजेंसी सेवा डायल-112
डायल-112 की नई गाड़ियां अब तक यार्ड में ही खड़ी हैं?
– गाड़ियां तैयार हैं। जल्द ही गाड़ियों को लोगों की सेवा के लिए लाया जाएगा। हमारी तरफ से कोशिशें जारी हैं। अब तक पुरानी गाड़ियां ही सड़क पर दौड़ रही हैं?
– कुछ कारणवश अब तक नई गाड़ियां नहीं आ पाई थी, लेकिन अब गाड़ियां तैयार हैं। जल्द ही आपको दिखेंगी।
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