मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 10वें अतिरिक्त सदस्य आदित्य जोशी की अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली एक गृहिणी को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक फैस …और पढ़ें

HighLights
- मुंगेली सड़क हादसे में मुआवजे पर कोर्ट की बड़ी नजीर
- मृतका सुमन पैकरा को मिला ‘कुशल श्रमिक’ का दर्जा
- पति के साथ सास-ससुर को मिलेगा मुआवजे का हिस्सा
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 10वें अतिरिक्त सदस्य आदित्य जोशी की अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली एक गृहिणी को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एक गृहिणी को परिवार का गैर-कमाऊ सदस्य नहीं माना जा सकता। उनके द्वारा घर में दी जाने वाली निःस्वार्थ सेवाओं का एक बड़ा आर्थिक मूल्य होता है।
बीमा कंपनी और वाहन मालिक को ₹24.25 लाख मुआवजे का आदेश
कोर्ट ने मृतका को एक कुशल श्रमिक (स्किल्ड वर्कर) की श्रेणी में रखते हुए बीमा कंपनी और वाहन मालिक को संयुक्त रूप से पीड़िता के स्वजन को 24,25,194 का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही दावा पेश करने की तिथि से राशि भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
वर्ष 2023 में मुंगेली जिले में हुआ था हादसा
घटना 28 फरवरी 2023 की रात करीब 10 से 11 बजे के बीच मुंगेली जिले के लालपुर थाना अंतर्गत ग्राम गुरुवाइन के पास हुई थी। ठाकुर देवपारा, कुकुरुदीकला पचपेड़ी निवासी मृतका सुमन पैकरा (22 वर्ष) पति मनोज कुमार कंवर और बेटे के साथ मोटरसाइकिल से जा रही थीं। इसी दौरान टाटा माजदा एमएच 48 सीबी 3690 के चालक रामआसरे यादव निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश ने लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे सुमन की मौत हो गई।
ऐसे तय हुआ मुआवजा
- कुशल श्रमिक का दर्जा: कोर्ट ने श्रम आयुक्त की अधिसूचना के तहत ‘सी’ क्लास एरिया में कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी ₹428 प्रतिदिन मानी। इस आधार पर मृतका की मासिक आय 11,128 और वार्षिक आय 1,33,536 रुपये तय की गई।
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मृतका के पिता के साथ, सास-ससुर को भी मिलेगी राशि
- अधिकरण ने आदेश दिया है कि कुल स्वीकृत मुआवजे की राशि में से मृतका के सास और ससुर दिलीप कुमार व बिसाहिन बाई को 15-15 प्रतिशत हिस्सा नकद उनके बैंक खातों में दिया जाएगा।
- शेष 70 प्रतिशत राशि मृतका के पति मनोज कुमार को मिलेगी, जिसमें से 60 फीसदी हिस्सा उन्हें नकद भुगतान किया जाएगा और बाकी 40 फीसदी हिस्से को अगले दो वर्षों के लिए बैंक में फिक्स डिपाजिट कराया जाएगा। अधिकरण ने बीमा कंपनी को एक माह के भीतर यह राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं।
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