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श्रीमती बहुरा साहू के पुत्र प्रमोद साहू की रिपोर्ट रायपुर में गुमशुदा बच्चों से जुड़ी दो घटनाओं ने पुलिस और परिजनों को राहत दी है। पहली घटना में कोरोना लॉकडाउन के दौरान लापता हुआ बेटा 6 साल बाद जिंदा मिला, जबकि दूसरी घटना में 10 साल की बच्ची 1147 किलोमीटर दूर अहमदाबाद में सुरक्षित बरामद की गई। रायपुर के घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली कुंती सोना का बेटा 11 साल का 2020 के पहले लॉकडाउन के दौरान लापता हो गया था। उस समय शहर में लॉकडाउन होने के कारण वह बाहर नहीं निकल पाई। परिचितों के जरिए आसपास काफी तलाश की गई, लेकिन बेटा नहीं मिला। कुंती हर दिन इस उम्मीद में बैठी रहती थी कि बेटा लौट आएगा। महीने साल में बदल गए, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। दो साल बाद उसने उम्मीद भी छोड़ दी। रोजी-रोटी में व्यस्त हो गई। जहां वह काम करती थी। उनसे भी मदद मांगी। करीब 6 साल बाद अचानक मोहल्ले में रहने वाला एक युवक आया उसने बताया कि दीपक तमिलनाडु के आश्रम में है। यह सुनकर कुंती घबरा गई और बोली-कहां है वो, जिंदा तो है न, मिल गया क्या? युवक ने बताया कि एक आश्रम में है। जहां उसका बेटा मिला है और उसका इलाज चल रहा है। मामला पुलिस कमिश्नर तक पहुंचने के बाद बच्चे को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक टीम तमिलनाडु के लिए रवाना कर दी गई है। कुंती खुद बेटे को लाने जा रही है। खेलने निकली और अहमदाबाद पहुंच गई
तेलीबांधा इलाके से 5 मई की शाम 6 बजे घर से खेलने निकली 10 साल की बच्ची लापता हो गई। तीन घंटे तक घर नहीं लौटने पर मां उमा मिश्रा, पिता राहुल और दादी ने उसकी तलाश शुरू की। रात 12 बजे तक खोजबीन के बाद भी बच्ची नहीं मिली तो थाने में अपहरण की सूचना दी गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और बच्ची की जानकारी गुम इंसान पोर्टल पर अपलोड की। साथ ही जीआरपी और आरपीएफ को भी सूचना भेजी गई। इधर, माता-पिता रोते-बिलखते बच्ची की तलाश करते रहे। इसी दौरान 7 मई की शाम सूचना मिली कि बच्ची 1147 किलोमीटर दूर अहमदाबाद पहुंच गई है। वहां की जीआरपी ने उसे सुरक्षित रखा। अगले दिन पुलिस टीम बच्ची के माता-पिता को लेकर गुजरात रवाना हुई। शनिवार दोपहर बच्ची परिजनों को मिल गई। बताया गया कि एक व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था और ट्रेन में छोड़ दिया। मां को देखते ही बच्ची रोने लगी। परिजन देर रात उसे लेकर रायपुर के लिए रवाना हो गए।
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