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प्रदेश में हुए 540 करोड़ के अवैध कोल लेवी केस में ईओडब्ल्यू ने शनिवार को निलंबित आईएएस समीर बिश्नोई की महासमुंद के बागबाहरा स्थित 9 प्रॉपर्टी कुर्क कर ली। इनमें एक भी प्रॉपर्टी समीर के नाम पर नहीं है। ये संपत्तियां उनके रिश्तेदारों और अलग-अलग फर्मों के नाम पर खरीदी गई हैं। कुल मिलाकर करीब 30 एकड़ जमीन पर कार्रवाई हुई है, जिसकी कीमत 4 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। इससे पहले ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में 20 करोड़ रुपए की पांच प्रॉपर्टी कुर्क की थी और इनके खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी थी। कुछ माह पहले ईओडब्ल्यू ने निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया की 8 करोड़ रुपए की 16 प्रॉपर्टी कुर्क की थी। वहीं, ईडी ने 39 करोड़ रुपए की 29 प्रॉपर्टी कुर्क की है। ईओडब्ल्यू का दावा है कि कोयले से मिले कमीशन से ये संपत्तियां खरीदी गई हैं। समीर ने अधिकांश निवेश अपने परिचितों और रिश्तेदारों के नाम पर किया है। इन संपत्तियों को कम कीमत पर खरीदा गया, जबकि इनकी वास्तविक कीमत कहीं अधिक है। 4 किलो सोना और 24 कैरेट का हीरा जब्त: ईडी ने अक्टूबर 2022 में समीर के घर पर छापा मारा था। तलाशी के दौरान उनकी पत्नी के पास से 4 किलो सोना, 24 कैरेट का एक हीरा और 47 लाख रुपए नकद मिले थे, जिन्हें जब्त कर लिया गया था। इसके बाद 20 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी भी कुर्क की गई थी। अब ईओडब्ल्यू ने आगे की कार्रवाई करते हुए नई कुर्की की है। 250 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी कुर्क: अवैध कोल लेवी केस में निलंबित आईएएस रानू साहू, समीर बिश्नोई, सूर्यकांत तिवारी, सौम्या चौरसिया, सुनील अग्रवाल समेत 20 से अधिक लोगों की 250 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी कुर्क की जा चुकी है। इसमें जमीन, मकान, फ्लैट समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं। अधिकांश आरोपियों ने संपत्तियां अपने नाम पर न लेकर परिचितों, कर्मचारियों और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी हैं।क्या है कोल लेवी केस| जांच एजेंसियों के अनुसार, पिछली सरकार के दौरान कोल परिवहन पर अवैध टैक्स वसूला जाता था। एक गाड़ी से प्रति टन 25 रुपए की वसूली की जाती थी। यह रकम सिंडिकेट के माध्यम से नीचे से ऊपर तक पहुंचती थी। आरोप है कि यह पैसा मंत्री, विधायक से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाया गया। इस मामले में ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों एजेंसियों की जांच जारी है और अंतिम चार्जशीट पेश नहीं किया गया है।
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