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कोंडागांव के ग्राम बड़ेडोगर में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के पांचवें दिन हजारों श्रद्धालु शिव-पार्वती विवाह के साक्षी बने। पंडित शिवानंद महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान शिव के अलौकिक प्रसंगों का वर्णन किया, जिससे पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। कथावाचक पंडित शिवानंद महाराज ने समाज में ‘श्री’ और ‘श्रीमती’ शब्दों के प्रयोग और उनके महत्व पर सूक्ष्म बोध कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केवल उपाधियां नहीं, बल्कि शील और मर्यादा के प्रतीक हैं। कथा में माता आदिशक्ति के पार्वती रूप में राजा हिमावन और मैना देवी के घर अवतरण का प्रसंग जीवंत हो उठा। देवर्षि नारद ने पार्वती जी के गुरु बनकर उन्हें शिव की प्राप्ति का मार्ग दिखाया। महाराज जी ने मां पार्वती द्वारा महादेव को पति रूप में पाने के लिए किए गए कठिन व्रतों और तपस्या का विस्तार से वर्णन किया। कथा का मुख्य आकर्षण शिव-पार्वती विवाह प्रसंग रहा। भगवान शिव की अनोखी बारात निकाली गई, जिसमें भक्त स्वयं को थिरकने से रोक नहीं पाए। सुप्रसिद्ध संगीतकार लोकेश ने अपनी सुमधुर आवाज और भजनों के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि पंडाल में मौजूद हर श्रद्धालु नृत्य करने को मजबूर हो गया। भक्ति और संगीत के इस संगम ने बड़ेडोगर को साक्षात कैलाश नगरी में बदल दिया। कथा के विश्राम तक भक्तों का उत्साह चरम पर था। मां दंतेश्वरी की इस धरा पर आयोजित इस ज्ञान यज्ञ में आसपास के गांवों से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति ने भक्तों से अपील की है कि आगामी दिनों की कथा में भी इसी प्रकार उपस्थिति दर्ज कराकर पुण्य के भागी बनें।
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