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राजनांदगांव में ‘एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन’ (AIDA) के आह्वान पर सोमवार को जिला कृषि वस्तु विक्रेता संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संघ ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उप संचालक कृषि के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से लगातार अपील कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में 27 अप्रैल को देशभर के कृषि आदान व्यापारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे थे। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आगामी खरीफ सीजन से पहले वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। खाद के साथ जबरन उत्पाद बिक्री अपराध घोषित हो संघ की प्रमुख मांगों में से एक यह है कि उर्वरक कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों की जबरन बिक्री (लिंकिंग) को अपराध घोषित किया जाए। खाद की डिलीवरी रेल-हेड के बजाय सीधे डीलर के बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे डीलरों पर प्रति बैग 40-50 रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा। बढ़ती लागत को देखते हुए उर्वरक पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8% करने की मांग की गई है। ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए SATHI पोर्टल को अनिवार्य के बजाय वैकल्पिक बनाने की मांग भी शामिल है। अवैध HTBT बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए, या अधिकृत डीलरों को इसके नियमन की अनुमति दी जाए। यदि सीलबंद पैकिंग में नमूना (सैंपल) फेल होता है, तो विक्रेता को अपराधी के बजाय केवल गवाह माना जाए। इसकी पूरी जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए। कंपनियों के लिए पुराने या एक्सपायर्ड कीटनाशक स्टॉक को कानूनी रूप से वापस लेना अनिवार्य किया जाए। नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर के खिलाफ कठोर प्रावधानों को शिथिल करने की भी मांग की गई है।
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