भास्कर न्यूज | टिटिलागढ़ स्थानीय डीएन रिजॉर्ट में बुधवार को ‘वर्कशॉप ऑन स्ट्रेटेजी एंड प्लानिंग मीटिंग फॉर एक्सपोर्ट ऑफ मैंगो थ्रू एफपीसीएस’ विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टिटिलागढ़ व आसपास के अंचल के आम उत्पादक किसानों और व्यापारियों को उनके आम की उचित कीमत दिलाने और आम निर्यात की बेहतर व संगठित व्यवस्था तैयार करना था। दरअसल, टिटिलागढ़ अंचल में आम की बहुल मात्रा में पैदावार होती है। यहां लंगड़ा, आम्रपाली, तोतापल्ली, मल्लिका, दशहरी, बैगनपल्ली एवं सुंदरी जैसी कई प्रसिद्ध प्रजातियों के आम बड़े पैमाने पर उत्पादित होते हैं। अब तक अधिकांश किसान एवं आम बगीचा मालिक अपने आमों को पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार एवं ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले व्यापारियों को बेचते रहे हैं। व्यापारी सीधे बगीचों तक पहुंचकर खरीदारी करते हैं और आमों को विभिन्न राज्यों में निर्यात कर ले जाते हैं। कार्यक्रम में किसानों ने बताया कि कई बार फसल अत्यधिक मात्रा में तैयार हो जाने के बावजूद समय पर खरीदारों से संपर्क नहीं हो पाने अथवा उचित बाजार व्यवस्था नहीं होने के कारण आम खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान हेतु इस वर्कशॉप में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि किस प्रकार आमों को सही बाजार तक पहुंचाया जाए, व्यवस्थित निर्यात व्यवस्था बनाई जाए व किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के तैयार आमों की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में लंगड़ा, आम्रपाली, तोतापल्ली, मल्लिका, बैगनपल्ली व सुंदरी आम विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे। किसानों एवं बगीचा मालिकों ने अपने अनुभव, समस्याएं और सुझाव साझा करते हुए कहा कि यदि इस प्रकार की योजनाबद्ध व्यवस्था आगे भी जारी रही तो किसानों को काफी लाभ मिलेगा तथा फसल खराब होने की समस्या भी कम होगी। यह कार्यक्रम आंचलिक समृद्धि साधना अनुष्ठान द्वारा आयोजित किया गया, जिसे डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर व नाबार्ड भुवनेश्वर का सहयोग िमला। कार्यक्रम में नाबार्ड के डीडीएम विवेक नायक, स्थानीय विधायक नवीन जैन, कृषि उद्यान विभाग के अधिकारी एडीएच राकेश मिश्रा व आशा अनुष्ठान के संजीव पटनायक सहित हॉर्टिकल्चर विभाग के कई पदाधिकारी, क्षेत्र के आम उत्पादक किसान एवं आम बगीचा मालिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंचल के किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी लगातार आयोजित होने चाहिए, ताकि किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिल सके तथा नुकसान से बचाव हो कर सकें।
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