देर से प्रवेश और जल्दी परीक्षा से बिगड़ रहा परिणाम, बीए-बीएससी में 34-35 प्रतिशत ही उत्तीर्ण

रायपुर। काॅलेजों में देर तक प्रवेश होने का असर परिणामों में दिखने लगा है। सितंबर तक कालेजों में प्रवेश होने के कारण सेमेस्टर परीक्षाओं के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। यही कारण है कि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (पीआरएसयू) से संबद्ध कालेजों में बीए और बीएससी में 34 से 35 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण होने में सफल हो रहे हैं।
प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत कालेजों में पढ़ाई हो रही है। एनईपी में सेमेस्टर परीक्षाओं का प्रविधान है। सितंबर तक कालेजों में प्रवेश दिया जा रहा है, वहीं दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो जाती हैं। सिर्फ दो महीने में छात्रों को पूरे सेमेस्टर के विषय पढ़ाए जाते हैं।
इन दो महीनों में भी रविवार, जयंती और त्योहार को मिलाकर लगभग एक महीने की छुट्टी रहती है। इस कारण से प्रथम सेमेस्टर के छात्रों को सिर्फ एक महीने की पढ़ने का अवसर मिलता है। इसके कारण सेमेस्टर परीक्षा में बहुत कम छात्र ही उत्तीर्ण हो रहे हैं।
प्रदेश के कालेजों में एनईपी शिक्षा सत्र 2024-25 से लागू हुई है। पहली बार हुई सेमेस्टर परीक्षा में बीए के 65 प्रतिशत और बीएससी के 66 प्रतिशत विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम एटीकेटी था। इसी तरह दूसरे वर्ष भी बीए में 56 प्रतिशत और बीएससी में 52 प्रतिशत विद्यार्थी एटीकेटी आए हैं। एनईपी के तहत वर्तमान समय में तीसरे वर्ष यानी पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई चल रही है।
काॅलेजों में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश सितंबर तक चलते हैं। दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षा होती है, इस कारण से छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहता है। स्कूल से कालेज में आने के बाद छात्रों में बहुत सारे बदलाव आते हैं। वो खुद को उस बदलाव के अनुरूप ढालते हैं। इस वजह से छात्रों को पढ़ने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, उनकी परीक्षाएं देर से हो।
वहीं छात्रों से जब फीस पूरे सेमेस्टर की ली जाती है तो उनको दो महीने पढ़ाकर ही परीक्षा क्यों ली जाए। उन्हें भी पढ़ने का पूरा अवसर मिले। इससे परीक्षा परिणाम में भी सुधार होगा। यह बात प्रो. केशरी लाल वर्मा, पूर्व कुलपति पीआरएसयू ने कही।
सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया होने के कारण प्रथम सेमेस्टर की पढ़ाई प्रभावित होती है। इस वर्ष से स्कूली शिक्षा सत्र में बदलाव किया गया है। परीक्षाएं जल्दी होंगी। परिणाम में जल्दी आएंगे। शासन को कालेजों की प्रवेश प्रक्रिया भी जल्दी शुरू करनी चाहिए। यह कहना है डा. मेघेश तिवारी, अध्यक्ष निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ का।
कालेजों में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश 12वीं के आधार पर होते हैं। 12वीं के परिणाम मई में आ जाते हैं, इसके बावजूद प्रवेश प्रक्रिया एक महीने बाद जून में शुरू होती है। 12वीं के परिणाम आते ही शासन को प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर देना चाहिए। इससे अगस्त में प्रवेश पूरे हो जाएंगे। यह बात डा. देवाशीष मुखर्जी, सचिव, निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ ने कही।



