जितेंद्र सिंह दहिया, नईदुनिया, रायपुर। अभनपुर, कुरुद के बाद अब राजनांदगांव में भी भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाला सामने आया है। यहां पर भी पूर्व मंत्री के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर और नान घोटाले के आरोपित रोशन चंद्राकर ने जहां-जहां से भारतमाला सड़क गुजरी उन गांवों में जमीन खरीदी।
उन्हीं में करोड़ों के मुआवजे का खेल किया गया। नईदुनिया को मिले दस्तावेजों के मुताबिक ग्राम देवादा पटवारी हल्का 63 में भारतमाला भू-अर्जन मुआवजा वितरण को लेकर अनियमितता की है।
नामांतरण में हेरफेर कर करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाई
शिकायत में दावा है कि आरजीएस कालोनाइजर प्रा.लि. और उससे जुड़े डायरेक्टरों ने भूमि को छोटे खसरा टुकड़ों में विभाजित कर फर्जी फसल एवं पौधारोपण का उल्लेख कर तथा नामांतरण में हेरफेर कर शासन को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाई है।
आशय पत्र पांच फरवरी 2018, प्रारंभिक प्रकाशन नौ मार्च 2018 तथा अवार्ड 25 फरवरी 2019 के बाद भी वर्ष 2024 तक पुनः अवार्ड प्रक्रिया में संदिग्ध प्रविष्टियां दर्ज होने का आरोप है। खसरा 162, 130, 129, 128 और 127 शृंखला में समान मुआवजा पैटर्न, एक जैसे रकबे और दोहराए गए भुगतान किए।
दीप्ति, रोशन, सीमा और भूपेंद्र जैसे नामों में परिवर्तन कर लाभ लिया। कुल मुआवजा राशि 12.35 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। ई-स्टाम्प और रजिस्ट्री रिकॉर्ड में भी भिन्नता है।
रोक के बाद बदलते रहे दस्तावेज
अधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार आशय पत्र पांच फरवरी 2018 को जारी हुआ, प्रारंभिक प्रकाशन 29 अप्रैल 2022 को हुआ तथा तीसरा अवार्ड 14 अगस्त 2024 को पारित किया गया। इसके बीच नामांतरण, रजिस्ट्री और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कई बार संशोधन किए।
कई खसरों में एक ही भूमि के लिए अलग-अलग चरणों में अलग प्रविष्टियां दर्ज की हैं। इससे संदेह है कि प्रक्रिया के दौरान रिकार्ड में बदलाव कर फायदा लिया गया।
आरजीएस कालोनाइजर और डायरेक्टरों ने भी किया खेल
दस्तावेजों के अनुसार आरजीएस कालोनाइजर प्रा.लि. के डायरेक्टर बसंत कुमार जैन, देवेंद्र मध्यानी और भूपेंद्र चंद्राकर के नाम पर भूमि को अलग-अलग खातेदारों के रूप में दर्शाया। एक ही फर्म होने के बावजूद मुआवजा सूची में तीनों को अलग-अलग लाभार्थी दिखाकर भुगतान कराया। फर्म की भूमि को डायरेक्टरों और उनके स्वजन के नाम पर विक्रय कर मुआवजा प्राप्त किया।
खसरा विभाजन से करोड़ों के नुकसान का दावा
भूमि को छोटे-छोटे खसरा टुकड़ों में विभाजित कर अलग-अलग नामों पर दर्ज किया, जिससे अधिक मुआवजा लिया गया। कई खसरों में समान रकबा और समान दर पर भुगतान दिखाया। इस प्रक्रिया में शासन को लगभग 12,35,99,102.82 से अधिक का नुकसान हुआ। एक ही क्षेत्र की भूमि को बार-बार विभाजित कर अलग-अलग प्रकरणों में दर्ज करने से दो बार भुगतान लिया है।
पेड़ और फसल विवरण पर फर्जीवाडा
खसरा 130/02 में 149 पेड़ दर्शाकर ₹19,29,153.60 मुआवजा लेने का आरोप है, जबकि रजिस्ट्री में पेड़ों का उल्लेख निरंक बताया था। खसरा 131/10 में असिंचित सोयाबीन फसल दिखाकर 27,19,087.91 तथा 131/5 में ₹19,97,697.24 रुपये का मुआवजा प्राप्त किया है।
उस क्षेत्र में जहां से भारतमाला सड़क गुजरने वाली है यह जानकारी उजागर हो गई थी। इसी का फायदा उठाकर निर्धारित क्षेत्र में जमीनें खरीदी गईं। वास्तविक स्थिति और रिकार्ड में भारी अंतर है, जिससे फसल और पेड़ के आधार पर मुआवजा बढ़ाकर लिया गया।
-कृष्णकुमार साहू, शिकायतकर्ता
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