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छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर देर रात तक छापेमारी की, जिसे लेकर अब सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है। कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अजय चंद्राकर लगातार सरकार से सवाल पूछते रहे हैं, जिससे सरकार असहज रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र में सरकार को कटघरे में खड़ा करने के बाद से ही उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा था और उसी के तहत ED को भेजा गया। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अब तक विपक्ष को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब अपने ही लोगों पर कार्रवाई हो रही है, यही भाजपा का असली चरित्र है। 15 घंटे तक चली जांच सोमवार सुबह करीब 6 बजे ED की टीम भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंची और लगभग 15 घंटे तक जांच करती रही। देर रात करीब 1 बजे टीम वापस लौटी। इस दौरान जांच एजेंसी अपने साथ दो बैग में महत्वपूर्ण दस्तावेज, जमीन से जुड़े कागजात, एक मोबाइल फोन और करीब 8 से 9 लाख रुपए नकद लेकर गई है। हालांकि ED की ओर से इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घर को अंदर से लॉक कर जांच धमतरी जिले के कुरूद स्थित सरोजिनी चौक के पास भूपेंद्र चंद्राकर के घर पर यह कार्रवाई हुई। सुरक्षा के लिए सुरक्षाबल तैनात रहे। जांच के दौरान घर को अंदर से लॉक कर दिया गया था, ताकि बाहरी आवाजाही रोकी जा सके। शिकायतों के आधार पर कार्रवाई इससे पहले भी ED रायपुर और अभनपुर में गोपाल गांधी और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज जब्त कर चुकी है। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में 500 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी शुरुआती जांच में सामने आया है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि घोषित कर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया। साथ ही एक ही खसरे की जमीन को कागजों में अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग नामों पर भुगतान किया गया। ED इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों में कार्रवाई कर करोड़ों की संपत्ति अटैच कर चुकी है। कैसे हुआ घोटाला? भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण के नाम पर करीब 43 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला सामने आया है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ रुपए का भुगतान दिखाया गया। आरोप है कि SDM, पटवारी और भू-माफिया के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर इस घोटाले को अंजाम दिया। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई इस मामले में खबर सामने आने के बाद कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। वहीं इससे पहले जगदलपुर नगर निगम के कमिश्नर निर्भय साहू पर भी कार्रवाई हुई थी। दोनों मामलों में जांच रिपोर्ट आने के करीब 6 महीने बाद कार्रवाई की गई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारियों-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक की गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।
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