सतीश पांडेय, रायपुर। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ प्रदेश सरकार की जीरो टालरेंस नीति का असर जमीन पर दिखने लगा है। पिछले सवा दो साल के भीतर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न विभागों के 128 अधिकारी-कर्मचारियों को सलाखों के पीछे भेजा है।
पकड़े गए भ्रष्ट कर्मियों में हर दूसरा राजस्व विभाग से जुड़ा है। वर्ष 2019 से मार्च 2026 तक के सवा सात वर्षों में कुल 199 भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों की गिरफ्तारी की गई है। इनमें एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी और कोटवार तक शामिल हैं।
2025 में अकेले सूरजपुर जिले में सर्वाधिक 10 गिरफ्तारियां
शिकायतों का मुख्य केंद्र भारतमाला परियोजना में मुआवजा वितरण घोटाला, जमीन का नामांतरण, सीमांकन (नाप-जोख) और राजस्व विवाद रहे हैं। वर्ष 2025 में अकेले सूरजपुर जिले में सर्वाधिक 10 गिरफ्तारियां हुईं, जबकि मुंगेली में छह और रायपुर-रायगढ़ में पांच-पांच कार्रवाई की गई।
सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी और कई खंड शिक्षा अधिकारी जांच एजेंसी के बिछाए जाल में फंस चुके हैं। वहीं, लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग में इंजीनियरों द्वारा ठेकेदारों से ओके सर्टिफिकेट देने के बदले कमीशन वसूलने के मामले भी सामने आए हैं
2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 15 भ्रष्ट कर्मियों को दबोचा
2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 15 भ्रष्ट कर्मियों को दबोचा जा चुका है। शिक्षा और तकनीकी विभागों में कमीशनखोरी का जाल भ्रष्टाचार का यह खेल केवल राजस्व तक सीमित नहीं है। शिक्षा विभाग में पदस्थापना, मेडिकल क्लेम और पेंशन जारी करने के नाम पर वसूली हो रही थी।
बड़े घोटालों पर कसता कानूनी शिकंजा
भ्रष्टाचार व रिश्वत के मामलों के साथ ही ईओडब्ल्यू राज्य के सात बड़े घोटालों की परतें भी उधेड़ रही है। इनमें 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में 51 आरोपितों के खिलाफ नौवां चालान पेश किया जा चुका है। वहीं, 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले में 20 आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है।
20,000 करोड़ रुपये के ऑनलाइन महादेव एप सट्टेबाजी केस में 18 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं। विदेश में बैठे एप के प्रमोटरों की करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त कर उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
तेंदूपत्ता बोनस घोटाले की भी तफ्तीश जारी है
इसके अलावा 500 करोड़ रुपये के भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों की गिरफ्तारी की गई। वहीं, डीएमएफ, कस्टम मिलिंग, सीजीपीएससी और तेंदूपत्ता बोनस घोटाले की भी तफ्तीश जारी है।
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आय से 1800 प्रतिशत अधिक संपत्ति का राजफाश
भ्रष्टाचार की जड़ें उच्च प्रशासनिक स्तर तक भी गहरी हैं। निलंबित आइएएस समीर विश्नोई, रानू साहू और वन सेवा के अधिकारी अशोक कुमार पटेल पर आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज हैं। सबसे बड़ी कार्रवाई सौम्या चौरसिया के विरुद्ध हुई है, जिनकी वैध आय से 1,800 प्रतिशत अधिक अवैध संपत्ति का राजफाश हुआ है।
राज्य सरकार की जीरो टालरेंस नीति के तहत हम लगातार सभी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले सवा दो साल के भीतर 128 भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों को पकड़ा गया है, जिनमें राजस्व विभाग के सर्वाधिक हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
-अमरेश मिश्रा , चीफ, ईओडब्ल्यू-एसीबी।
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