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राज्य में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया गया “रक्षक” पाठ्यक्रम अब जमीन पर उतरने के करीब है। इस कोर्स की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए विश्वविद्यालयों की बैठक पूरी हो चुकी है। बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि अपकमिंग शैक्षणिक सत्र से इस कोर्स में एडमिशन शुरू किए जाएंगे। डॉ. शर्मा ने कहा कि यह सिर्फ पढ़ाई का कोर्स नहीं है, बल्कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक सोशल मिशन है। इसका मकसद युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें इस क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार करना है, ताकि समाज में बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ सके। राज्य के 6 विश्वविद्यालय शामिल हुए बैठक में राज्य के 6 विश्वविद्यालय शामिल हुए, जिनमें अब कोर्स की ब्रीफ जानकारी इस कोर्स में बच्चों से जुड़े जरूरी विषय पढ़ाए जाएंगे, जैसे:
कोर्स की जरुरत समझिए अभी विश्वविद्यालयों में बच्चों के अधिकारों पर स्पेशल कोर्स की कमी है। यह कोर्स युवाओं को इस क्षेत्र में जानकारी और प्रैक्टिकल अनुभव दोनों देगा। नौकरी के मौके मिल सकते हैं कोर्स पूरा करने के बाद युवाओं को सरकारी बाल संरक्षण विभाग, NGO (गैर सरकारी संगठन), बाल कल्याण समितियां, इंटरनेशनल संस्थाएं में काम और
साथ ही ट्रेनिंग और गेस्ट लेक्चर के मौके भी मिल सकते हैं। आगे क्या होगा? आयोग का कहना है कि जल्द ही इस कोर्स को कॉलेजों में शुरू किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालयों और आयोग के बीच लगातार सहयोग रहेगा, ताकि छात्रों को सही ट्रेनिंग मिल सके।
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