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कोरबा के भैसमा तहसील स्थित ग्राम पतरापाली में आदिवासी किसानों की जमीन बेनामी खरीद के जरिए हड़पने के प्रयासों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। किसान सभा ने इस मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। पतरापाली आदिवासी बहुल गांव है, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण खेती-किसानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोग भूमि कानूनों की जानकारी न होने का फायदा उठाकर उनकी पैतृक जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। आदिवासी बहुल गांव में बढ़ा जमीन विवाद प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि वे पीढ़ियों से अपनी जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। पिछले करीब एक महीने से कुछ बाहरी लोग गांव पहुंचकर कृषि भूमि पर दावा कर रहे हैं। वे पंजीयन से जुड़े कुछ दस्तावेज दिखाकर जमीन खाली करने का दबाव बना रहे हैं और बेदखली की धमकी दे रहे हैं। ‘1990 में जमीन खरीदी थी’ कहकर कर रहे दावा ग्रामीणों के मुताबिक, जिन लोगों ने जमीन पर दावा किया है, उन्हें गांव का कोई व्यक्ति पहचानता तक नहीं है। बाहरी लोग यह कहते हुए जमीन अपनी बता रहे हैं कि उन्होंने वर्ष 1990 में ग्रामीणों के पूर्वजों से यह भूमि खरीद ली थी। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक गैर-आदिवासी व्यक्ति ने सगे भाइयों मंगल सिंह और भूखन लाल को उनकी जमीन से बेदखल कर वहां घेरा डाल दिया। किसान सभा और सीटू ने उठाए सवाल प्रदर्शन में शामिल किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू और सीटू के राज्य महासचिव एस एन बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में भी इसी तरह के एक मामले में अनुविभागीय अधिकारी कोरबा ने प्रकरण क्रमांक 8/अ-23/99-2000 में पीड़ित आदिवासी के पक्ष में फैसला देते हुए गैर-कानूनी भूमि अंतरण को निरस्त कर दिया था। ‘आदिवासी जमीन का अंतरण कानूनन अवैध’ किसान नेताओं ने कहा कि जिन जमीनों को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उनमें 40-50 साल पुराने विक्रय का दावा किया जा रहा है, जबकि मूल भूस्वामी आज भी जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को अंतरण कानूनन प्रतिबंधित है। ऐसे में इस प्रकार के सौदों को फर्जी और बेनामी बताते हुए उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशासन ने शिविर लगाकर जांच का दिया आश्वासन ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने गांव में शिविर लगाकर भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों की जांच और निराकरण कराने का आश्वासन दिया है। किसान सभा और सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। संगठनों ने यह भी आशंका जताई कि पतरापाली ही नहीं, आसपास के अन्य गांवों में भी इस तरह के फर्जी भूमि सौदे हुए हो सकते हैं। इसलिए पूरे क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर भूमि सत्यापन कराने की मांग उठाई गई है।
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