छत्तीसगढ़ के कोरबा से बिलासपुर आ रही एक मेमू लोकल ट्रेन मंगलवार दोपहर 4 बजे मिडिल लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। दुर्घटना बिलासपुर स्टेशन से पहले लालखदान के पास हुई। हादसे में लोको पायलट समेत 11 लोगों की मौत हो गई। 25 से ज्यादा घायल हैं। 8 के शव निका
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50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही मेमू में करीब 200 यात्री सवार थे। मेमू ट्रेन ने मालगाड़ी को पीछे से इतनी तेज टक्कर मारी कि मेमू का इंजन मालगाड़ी के ब्रेक वैन को लेकर कोयले से भरे वैगन पर चढ़ गया। मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर ने कूदकर जान बचाई। मेमू के लोको पायलट विद्या सागर का शव 3:30 घंटे बाद बोगी काटकर निकाला गया, जबकि असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज गंभीर घायल हुए हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित इंजन से लगे डिब्बे के यात्री हुए हैं। वहीं, सीएम विष्णुदेव साय ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने घटना के बारे में जानकारी ली और हरसंभव मदद के निर्देश दिए हैं। सीएम ने ट्रेन दुर्घटना को दुखद और पीड़ादायक बताया है। दक्षिण पूर्वी सर्किल के कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी बीके मिश्रा गतौरा रेल दुर्घटना की जांच करने के लिए 6 नवंबर की सुबह बिलासपुर पहुंचेंगे। वे सुबह 9 बजे से डीआरएम कार्यालय में अपनी जांच शुरू करेंगे।

जोरदार धमाका हुआ, गाड़ी के पास पहुंचे तो मची थी अफरा-तफरी पटरी के किनारे हमारा मकान है। घटना के समय हम लोग घर में थे। जोरदार धमाका हुआ तो बाहर निकले। देखने से समझ में आया तो हम गाड़ी की ओर भागे। पहुंचे तो वहां अफरा-तफरी मची हुई थी। यात्री उतर कर इधर-उधर भाग रहे थे। ट्रेन के भीतर घुसे और घायलों को निकालकर बाहर रखते गए। कुछ देर बाद एंबुलेंस आई तो उसमें अस्पताल भेजे। शाम करीब 4.30 बजे तक करीब 10 लोगों को निकाल चुके थे। कोई चल नहीं पा रहा था, तो किसी के हाथ में और किसी के सिर में चोट थी। हमने चार पांच डेड बॉडी भी देखे। -जैसा कि प्रत्यक्षदर्शी नरेंद्र मौर्य ने भास्कर को बताया।
जांच के बाद स्पष्ट होगा कारण ^कोरबा से आ रही मेमू ने मालगाड़ी को टक्कर मारी है। घायलों का इलाज चल रहा है। सीआरएस स्तर पर जांच कराई जाएगी। इसके बाद कारण स्पष्ट होगा। डॉ. सुष्कर विपुल विलास राव, सीपीआरओ
ऑटो सिग्नल: 100 मीटर के अंतर से एक के पीछे एक चलती हैं लालखदान के पास जिस जगह ट्रेन दुर्घटना हुई है, वहां से लेकर बिलासपुर और आगे चांपा की दिशा में जयरामनगर के आगे तक ऑटो सिग्नल शुरू हो चुका है। इसकी वजह से अब ट्रेनें 100 मीटर के अंतराल में एक के पीछे एक चलती हैं। मंगलवार को भी ऐसा ही हुआ।
दुर्घटना की दो वजह हो सकती है या तो ऑटो सिग्नल सिस्टम फेल हो गया होगा या फिर लोको पायलट ने सिग्नल को ओवरशूट किया हो। हालांकि सिग्नल फेल होने की अधिक आशंका जताई जा रही है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
रेलवे 10 लाख, राज्य सरकार 5 लाख देगी रेलवे ने हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख और सामान्य घायलों को एक लाख देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है।
15 हजार से ज्यादा इंजन, 1290 में ही कवच, SECR में एक भी नहीं
अनुपम सिंह की रिपोर्ट
रेलवे के पास देशभर में इलेक्ट्रिक और डीजल को मिलाकर 15 हजार से अधिक इंजन हैं। इसके अलावा करीब 92 हजार कोच और करीब 3 लाख 27 हजार वैगन हैं। कवच सिस्टम सिर्फ 1290 इंजनों में ही लगाए जा सके हैं। कोयले की ढुलाई से देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के फिलहाल किसी भी इंजन में कवच सिस्टम नहीं लगा है। बीते वित्तीय वर्ष में बिलासपुर जोन ने 27000 करोड़ की कमाई की है।
कवच सिस्टम पर 2016 में परीक्षण शुरू किया गया था। इससे ट्रेन हादसों को रोका जा सकता है, लेकिन एक इंजन में कवच सिस्टम लगाने पर 80 से 90 लाख रुपए का खर्च आता है। प्रारंभिक रूप से परीक्षण कामयाब रहने पर वर्ष 2020 में यह सिस्टम स्थापित करने की शुरुआत की गई।
राज्यसभा में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक सवाल के जवाब में जानकारी दी थी कि जुलाई 2025 तक 1290 में कवच सुरक्षा प्रणाली स्थापित किए जा चुके हैं। जबकि 10 हजार इंजनों का लक्ष्य तय किया गया है।जुलाई 2025 तक 15 हजार से अधिक इंजनों में से सिर्फ 1290 रेल इंजनों में कवच प्रणाली का प्रावधान किया जा चुका है।
यानी अब भी 8710 इंजनों में यह सिस्टम लगना बाकी है। एक इंजन पर कवच सिस्टम लगाने पर करीब 80 लाख रुपए खर्च होते हैं।
क्या है कवच सिस्टम
कवच एक अत्याधुनिक सिस्टम है, जिसे जुलाई 2020 में ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के तौर पर अपनाने का निर्णय लिया गया था। रेलवे के अनुसार इससे ट्रेन और लोको पायलट को अत्याधुनिक सुरक्षा-संरक्षा मिलती है। यह लोको पायलट के फेल होने पर ऑटोमेटिक ब्रेक लगाकर ट्रेन को निर्धारित गति सीमा के भीतर चलाने में मदद करता है।
भास्कर एक्सपर्ट – बीके जोशी पूर्व रेल अधिकारी
ये कारण भी… सिग्नल फेल या ओवरशूट
दुर्घटना की दो वजह हो सकती हैं। ऑटो सिग्नल सिस्टम फेल हुआ या लोको पायलट ने सिग्नल ओवरशूट किया। पहला, सिग्नल में खराबी या ब्रेक न लगने जैसी तकनीकी त्रुटि हो सकती है। दूसरा, मेमू ड्राइवर ने सिग्नल ओवरशूट किया हो या तय स्पीड मेंटेन नहीं करने के कारण ट्रेन को संभाल नहीं पाया हो।
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