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सरकारी विभाग से रिटायरमेंट के बाद 120 दिनों के भीतर पेंशन मिलने का सिस्टम तो नहीं लेकिन कोर्ट ने एक केस में आदेश देकर एक तरह से गाइड लाइन बनाई है। लेकिन यहां शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बड़े विभागों में रिटायरमेंट के 18-18 साल बाद भी पेंशन नहीं मिल रही ह
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मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल हैरान रह गए कि इतने बरसों बाद भी पेंशन क्यों नहीं मिली रही है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद ही भास्कर ने पेंशन प्रकरणों को लेकर पड़ताल की। पेंशन विभाग से जानकारी लेने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संसाधन और आदिम जाति कल्याण विभाग जैसे सबसे ज्यादा स्टाफ वाले विभागों की पड़ताल की। नवा रायपुर स्थित मुख्यालय से जानकारी लेने के अलावा रायपुर, महासमुंद और धमतरी जिला मुख्यालय से जानकारी निकलवायी।
बाबुओं ने गुम कर दी सर्विस बुक, चक्कर काट रहे कर्मी
कोरबा परिवहन विभाग में पदस्थ एक क्लर्क रिटायरमेंट के 8 साल बाद भी पेंशन के लिए चक्कर काट रहा है। इस क्लर्क को उस गलती की सजा मिल रही है जो इसने की ही नहीं है। उसकी सर्विस बुक कोरबा आरटीओ दफ्तर में थी। वहीं किसी ने सर्विस बुक गुमा दी। क्लर्क को तब पता चला जब रिटायर होने को केवल एक माह बचे थे।
1 संचालक को 18 और दो को रिटायरमेंट के 7-7 साल हो गए
स्वास्थ्य विभाग में 2002-03 में करीब 4.50 लाख के मलेरिया व उपकरणों की खरीदी की गई थी। इसकी खरीदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने भ्रष्टाचार के केस में एक-एक कर तीन डायरेक्टरों को पकड़ा। कोर्ट में केस चला। तीन में दो जेल गए। एक को अग्रिम जमानत मिली।
एक नजर में
- राज्य में पेंशनरों की संख्या- 1 लाख 45 हजार से अधिक।
- हर माह पेंशनरों को किया जा रहा भुगतान- 465 करोड़ से अधिक।
- स्वास्थ्य विभाग में 1500 से ज्यादा प्रकरण अटके।
- शिक्षा विभाग में 400 प्रकरणों पर चल रहा मंथन।
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