भास्कर न्यूज | राउरकेला ओडिशा में सत्ता परिवर्तन के बाद ‘जागा मिशन’ के तहत राउरकेला महानगर निगम द्वारा किए गए पट्टा वितरण का मामला फिर गरमा गया है। आरोप है कि मिशन की आड़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और बस्तीवासियों से पट्टा के नाम पर करोड़ों रु
.
जानकारी के अनुसार, कुल 4747 लाभार्थियों को प्रमाण पत्र देने योग्य घोषित किया गया था। इनमें से 1423 लाभार्थियों को मुफ्त में प्रमाण पत्र दिया गया, जबकि 1528 लोगों से 2 करोड़ 80 लाख 76 हजार 670 रुपये वसूले गए। निगम का कहना है कि यह राशि लेखा अनुभाग में जमा है और प्रमाण पत्र पर तहसीलदार के हस्ताक्षर मौजूद हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि यह तो केवल रिकॉर्ड में दर्ज रकम है, असली जांच उन पैसों की भी होनी चाहिए जो सीधे अधिकारियों की जेब में गए होंगे। बस्तीवासियों का कहना है कि उनसे ली गई रकम समान नहीं थी—किसी से लाखों तो किसी से कुछ हजार रुपये वसूले गए।
कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रमाण पत्र होने के बावजूद उनके घर वन विभाग या रेलवे द्वारा तोड़े गए, जिससे ये प्रमाण पत्र ‘अमान्य’ साबित हुए। राकॉपा ने इसे वोट बैंक की राजनीति बताते हुए कहा कि पिछली सरकार और स्थानीय नेताओं ने फर्जी पट्टा के नाम पर गरीबों को ठगा। बस्तीवासियों का आरोप है कि प्रमाण पत्र बैंक लोन तक के लिए मान्य नहीं, जिससे इसकी वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
<
