रायगढ़9 घंटे पहलेलेखक: सिद्धार्थ श्रीवासन
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प्लांट हादसे में मृतक मजदूरों के परिजनों ने रोते रोते कही अपनी बात।
छत्तीसगढ़ के सक्ती में वेदांता प्लांट में हुए हादसे ने 20 लोगों की जान ले ली, जबकि 16 घायल अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हादसे के बाद कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
इस हादसे ने न सिर्फ कई जिंदगियां छीनीं, बल्कि दर्जनों परिवारों को हमेशा के लिए बिखेर दिया। कहीं शादी का घर मातम में बदला, कहीं बच्चों का सहारा छिना, तो कहीं पिता-पुत्र का साथ हमेशा के लिए टूट गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

पोस्टमॉर्टम होने के बाद शव ले जाते हुए परिजन।

नदीम अंसारी (38)
‘अगर छुट्टी मिलती तो भाई जिंदा होता’
कानपुर के नदीम अंसारी (38) के छोटे भाई की शादी थी। जिस दिन परिजन शव को ले जाने रायगढ़ पहुंचे थे, उसी दिन शादी का रिसेप्शन था, नदीम के भाई समीर ने बताया कि भाई ने साईट इंजीनियर से शादी में जाने के लिए छुट्टी मांगी थी, लेकिन छुट्टी नहीं दी गई। अगर उन्हें छुट्टी मिल जाती तो आज भाई जिंदा होता।
नदीम के भाई लक्की अंसारी ने बताया भाई के 2 छोटे बच्चे है। हम घर में अपनी भाभी से क्या कहेंगे। हादसे से कुछ घंटे पहले उन्होंने अपने छोटे बेटे से वीडियो कॉल पर बात की थी।
‘जमीन पर तड़पता रहा, किसी ने मदद नहीं की’
समीर ने बताया कि वे भी भाई के साथ काम कर चुके हैं। मेरे पहचान के कुछ दोस्त वेदांता प्लाट में काम करते हैं। उन्होंने हमें वीडियों भेजा तब पता चला के हादसा हुआ है।
कंपनी की ओर से मुआवजा देंने का एलान किया गया है, लेकिन पैसों का क्या है, क्या मेरा भाई फिर से वापस आ जाएगा।


प्लांट में चाय पिलाने का काम करते थे ठंठा राम लहरे (32)
‘कर्ज चुकाने काम करता था भाई’
डभरा के जमगहन गांव में रहने वाले ठंठाराम लहरे (32) ने भी इस हादसे में अपनी जान गवा दी। उनके भाई जगजीवन लहरे ने बताया कि भाई पर 50 हजार का कर्ज था। उसे चुकाने के लिए वो रोज सुबह जल्दी उठते, टिफिन लेकर काम पर निकल जाते। भाई की 11 से 12 हजार रुपए की सैलरी थी।
प्लांट में मेरा भाई चाय पिलाने का काम करता था। मेरे भाई की 2 बेटियां है एक बेटी 3 साल की है और एक बेटी की 1 साल की है। जगजीवन ने बताया कि जब अपने भाई को ढूंढते-ढूंढते यहां पहुंचे, तो उसकी मौत की जानकारी मिली। अब उसके बच्चों के सर से पिता का साया उठ गया है।

अपने पिता का शव ले जाते हुए बेटा कीर्तन कुमार।

वेंदाता पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट में उद्धव सिंह की भी जान चली गई।
पिता-पुत्र एक साथ काम पर आते थे
इस हादसे में कीर्तन कुमार ने अपने पिता उद्धव सिंह यादव को खो दिया है। बेटे ने बताया कि वे और उसके पिता रोज साइकिल से काम पर जाते थे। रास्ते भर बातें होती थीं, लेकिन उस दिन कीर्तन की तबीयत खराब थी। वो घर पर रहा और पिता अकेले चले गए।
किर्तन यादव ने बताया कि वे और उसके पिता प्लांट में हेल्पर का काम करते थे। दोनों की सैलरी 11-12 हजार रुपए थी।

दामाद बिज्रेश कुमार का शव लेकर गए उदयराम।

ब्रजेश कुमार, सोनभद्र यूपी
दामाद का शव लेने पहुंचे ससुर
उदयराम अपने दामाद ब्रिजेश कुमार का शव लेने पहुंचे थे। ब्रिजेश उत्तर प्रदेश के सोनभद्र पिपरखंड से रहने वाले है। उनके ससूर ने बताया कि 5 साल पहले मेरी बेटी से उनकी शादी हुई थी। वे ठेकेदार के जरिए पेंटर का काम करते थे और परिवार के इकलौते कमाने वाले थे।
उदयराम ने बताया कि हादसे वाले दिन दोपहर में मेरे दामाद ने अपने परिवार से बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि लंच कर रहे हैं और बच्चों से वीडियो कॉल पर भी बात की। इसके बाद ड्यूटी पर गए और कुछ ही देर में हादसा हो गया। उदयाराम ने कहा कि मेरी बेटी और 2 छोटे बच्चों का क्या होगा? पैसे से क्या सब ठीक हो जाएगा? घर बिखर गया है।

अमृतलाल और उनकी पत्नी। प्लांट हादसे में अमृतलाल की मौत हो गई।
‘परिवार में पिता ही कमाते थे’
टुड्रा डभरा के रहने वाले अमृतलाल पटेल की भी हादसे में मौत हो गई है। उनकी उम्र करीब 50 साल थी। उनके बेटे चित्रसेन पटेल के बताया कि रोजाना की तरह ही पिता काम पर निकले थे। मैं अभी कॉलेज में पढ़ाई करता हूं। मां का रो रोकर बुरा हाल है।


पोस्टमॉर्टम कक्ष में पंचनामा करती हुई पुलिस।

ब्लास्ट में मजदूर 80% से ज्यादा झुलसे थे, जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
पोस्टमॉर्टम कक्ष के बाहर परिजनों की भीड़
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में 12 शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया। पहले यहां 10 लोगों को लाया गया, बाद में एक-एक कर 2 डेड बॉडी और लाई गई, जिसने भी यह मंजर देखा सहम उठे।
एक हादसे में इतने लोगों की मौत के चलते पोस्टमॉर्टम कक्ष के बाहर परिजनों की भीड़ उमड़ी हुई थी। अंदर एक के बाद एक शवों का पंचनामा किया जा रहा था। व्यवस्था संभालने के लिए 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे।
पुलिस की टीमें लगातार शवों की पहचान और कागजी प्रक्रिया में जुटी थीं। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि मेडिकल कॉलेज में ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा गया। रोते-बिलखते परिजन और एक के बाद एक शव को एंबुलेंस में लेकर अपने घर के लिए रवाना हुए।
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सक्ती वेंदाता पावर प्लांट हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता प्लांट हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 4 छत्तीसगढ़ से हैं, बाकी यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से हैं। हादसे में कुल 36 लोग झुलसे हैं, 16 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। पढ़ें पूरी खबर…

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