कोंडागांव के मर्दापाल में वन मंत्री केदार कश्यप के विधानसभा क्षेत्र में बस्तर संभाग के पारंपरिक सिरहा, गुनिया, बैगा, वैद्य और पुजारियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जंगलों से लुप्त हो रही दुर्लभ जड़ी-बूटियों और वनौषधियों का संर
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वन महादेव मंदिर परिसर में आयोजित इस ब्लॉक स्तरीय बैठक में “सिरहा गुनिया पारम्परिक वनौषधि वैद्य पुजारी संघ बस्तर संभाग” के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संघ ने गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाने, वनौषधियों की अवैध खरीदी-बिक्री रोकने और संघ को मजबूत बनाने के लिए ब्लॉक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा कार्यकारिणी समिति का गठन किया।
बैठक में बस्तर क्षेत्र में तेजी से गायब हो रही पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों की सुरक्षा, उनके अवैध क्रय-विक्रय पर रोक लगाने, सिरहा-गुनिया-वैद्य समुदाय को प्रशिक्षण देने की अपील की गई। साथ ही, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का भी निर्णय लिया गया।

वैद्यों ने पुराने ज्ञान को साझा किया
मौजूद पारंपरिक वैद्यों और सिरहाओं ने अपने सालों पुराने ज्ञान को साझा किया। ठेलूराम मौर्य ने वनौषधि से नसबंदी उपचार, रामचंद कश्यप ने नपुंसकता निवारण की जड़ी, बोमड़ा राम मंडावी (बास्तानार) ने लकवा, बवासीर और हड्डी जोड़ने की दवाई, बोगा राम मांझी (बारसूर) ने सूजन कम करने के लिए औषधीय स्नान, बुधराम गोंडिया पाल (आमाबाल) ने उल्टी-दस्त के इलाज में दक्षता, जमधर बड़े झुलना ने पेशाब में जलन और रुकावट दूर करने की जड़ी और बलराम कोर्राम (कोड़सानार) ने निमोनिया की जड़ी-बूटी से उपचार के अनुभव बताए।
संघ ने शासन से मांग की है कि पारंपरिक वनौषधि ज्ञान को संरक्षित किया जाए। इसके अलावा सिरहा-गुनिया-वैद्य पुजारियों को औषधीय पौधों की पहचान और संरक्षण पर प्रशिक्षण दिया जाए और वन विभाग और परंपरागत चिकित्सकों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।

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