दैनिक भास्कर ने परिवहन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष देवांगन से बातचीत की।
छत्तीसगढ़ में सभी दोपहिया और चारपहिया वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य हो गया है। 1 अप्रैल 2019 से पहले की गाड़ियों में वाहन मालिकों को इसे लगवाना होगा। वरना RTO के साथ मिलकर ट्रैफिक पुलिस फिर से चेकिंग अभियान चलाकार चालानी कार्रवा
.
वाहन मालिकों की सुविधा के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से जारी है। इसके बावजूद रायपुर में करीब 60% वाहन मालिकों के हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगवाया है। हालांकि इसमें कई गाड़ियां ट्रांसफर या स्क्रैप में भी जा चुकी है।
HSRP नंबर प्लेट लगवाने के लिए लोगों को कई अलग-अलग दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। जिसमें वाहन की RC में मोबाइल नंबर नहीं जुड़ा होना। RC का गुम या चोरी हो जाना। 15 साल पुरानी गाड़ी होना।
इन सभी दिक्कतों को देखते हुए दैनिक भास्कर ने परिवहन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष देवांगन से बातचीत की।

सवाल: किसी की आरसी कॉपी चोरी हो गई है, तो लोगों को क्या करना होगा?
जवाब: आरसी चोरी या गुम होने पर वाहन मालिक संबंधित थाने में चोरी या गुम होने शिकायत दर्ज कराए। आरसी की दूसरी प्रति लेने के लिए cgtransport.go.in में ऑनलाइन आवेदन, ONLINE FORM 26 के साथ सभी दस्तावेज (बीमा, प्रदृषण प्रमाण पत्र, स्वप्रमाणित आधार और पुलिस विभाग के वेबसाइट से जारी NCRB REPORT) ऑनलाइन अपलोड कर हार्ड कॉपी कार्यालय में जमा करें।
सवाल: आरसी में पुराना मोबाइल नंबर था, जो अब बदल गया है, उसे अपडेट करने का क्या प्रोसीजर रहेगा?
जवाब: नए मोबाइल नंबर अपडेट के लिए cgtransport.gov.in में ऑनलाइन आवेदन कर कार्यालय में आवेदन की प्रति, आधार, आरसी की प्रति के साथ जमा करेगा। यदि ऑनलाइन आवेदन नहीं हो पाने की दिशा में आरसी के प्रति, आधार कार्ड की प्रति में मोबाइल नंबर दर्ज स्वः प्रमाणित प्रति कार्यालय में जमा करें।
सवाल: 15 साल पुराने दो पहिया और चार पहिया के लिए क्या नियम है ?
जवाब: नवीनीकरण के लिए गाड़ी का सबसे पहले फिटनेस टेस्ट करवाना होगा। इसके लिए फॉर्म ऑनलाइन भरा जा सकता है, सिर्फ आरटीओ ऑफिस में फिटनेस टेस्ट के लिए जाना होगा। इस दौरान PUC की भी जांच की जाएगी। 5 साल के लिए वैलिडिटी एक्सटेंड किया जा सकता है।
सवाल: करीब कितने गाड़ियों का हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लग चुका है और कितनी गाड़ियों का बचा हुआ है?
जवाब: अभी तक 313711 वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लग चुका है। 379567 वाहनों में ऑर्डर के बाद हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए पेंडिंग है। कुल वाहनों की संख्या 1334483 है।
सवाल: जो लोग हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, उन पर क्या कार्रवाई होगी?
जवाब: बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के चल रहे वाहनों के खिलाफ मोटरयान अधिनिमय 1988 की धारा 50/177 के तहत चालानी कार्रवाई पुलिस या परिवहन विभाग कर रही है।
सवाल: क्यों आ रहा है HSRP नहीं होने का SMS?
जवाब: विभागीय समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई है कि, कई वाहनों में HSRP फिजिकल रूप से लगी हुई है, लेकिन उसका विवरण विभाग के वाहन सॉफ्टवेयर-पोर्टल पर अपडेट नहीं है। यानी गाड़ी पर नंबर प्लेट तो लगी है, लेकिन सिस्टम में उसकी एंट्री नहीं हुई है। इसी कारण सॉफ्टवेयर ऐसे वाहनों को HSRP नहीं लगी की कैटेगरी में दिखा रहा है और ऑटोमेटिक SMS भेजा जा रहा है।


क्या है हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट ?
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट एक विशेष तरह की नंबर प्लेट होती है, जिसे वाहनों की सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए सरकार ने अनिवार्य किया है। यह प्लेट, पुराने नंबर प्लेट से ज्यादा सुरक्षित होती है।

सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देश पर नियम लागू
अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। वाहन मालिक सुरक्षित रहे और उनकी गाड़ी की मॉनिटरिंग हो सके, इसलिए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाया जा रहा है। इसे लेकर राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना पहले जारी की थी।

इससे क्या फायदा होगा?
- वाहन चोरी की घटनाओं को रोकने, नियमों का उल्लंघन करने पर ई-चालान प्रक्रिया को आसान बनाने, इंटरनेट आधारित ट्रैफिक व्यवस्था के मकसद से इसे अनिवार्य किया गया है।
- हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स लेजर कोटेड हैं। इसमें जो सेफ लॉक को खोला नहीं जा सकता। उसे केवल तोड़ने के बाद ही हटाया जा सकता है।
- ऐसे में अगर वाहन चोरी हो जाए और चोर फर्जी नंबर प्लेट्स लगाकर वाहन चलाएंगे या बेचेंगे तो पकड़ में आ जाएंगे।
- साथ ही पूरे प्रदेश में नंबर प्लेट्स की स्टाइल, फॉन्ट, साइज और कलर में एकरूपता आएगी। फैंसी नंबर प्लेट्स के इस्तेमाल को रोका जा सकेगा।
- इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने में आसानी होगी। ई चालान, पॉल्यूशन, इंश्योरेंस और जीपीएस सिस्टम से मॉनिटरिंग आसान होगी।
- संदिग्ध वाहनों को ट्रेस करना आसान होगा। इससे रियल टाइम में लोकेशन के साथ ट्रेस करने की सुविधा मिल सकेगी।
<
