राजधानी रायपुर से नवा रायपुर, अभनपुर होते हुए धमतरी तक नई ब्रॉडगेज रेल लाइन पर यात्री ट्रेनों के परिचालन को लेकर रेलवे प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। मार्च 2026 के अंत तक रायपुर से धमतरी के बीच नियमित ट्रेन सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
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इसके लिए रेलवे बोर्ड से तारीख तय होने के बाद औपचारिक ऐलान किया जाएगा। रायपुर रेल मंडल के सीनियर DCM अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया कि, अभनपुर–कुरूद खंड में गेज कन्वर्जन का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जबकि कुरूद से धमतरी तक का काम भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
रेल लाइन को सुरक्षा और संरक्षा के सभी जरूरी मापदंडों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद रायपुर–धमतरी के बीच नियमित ट्रेन सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। जिससे यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक रेल संपर्क मिलेगा।

अब तक के डेवलेपमेंट ये है स्टेटस
- अभनपुर-राजिम खंड का गेज कन्वर्जन पहले ही पूरा हो चुका है। यहां यात्री सेवाएं शुरू हो चुकी हैं।
- रायपुर से अभनपुर और राजिम तक मेमू ट्रेनें सफलतापूर्वक चल रही है।
- नवा रायपुर में लूप लाइन नंबर-05 की गति सीमा 15 किमी/घंटे से बढ़ाकर 30 किमी/घंटे कर दी गई है।
- मंदिर हसौद–अभनपुर खंड पर गति सीमा अब 110 किमी/घंटे तक है।
नई ब्रॉडगेज लाइन से ये होंगे फायदे
- कम समय में सफर- रायपुर से धमतरी की यात्रा तेज़ और सुविधाजनक होगी।
- यात्रा खर्च में कमी- सड़क की तुलना में सस्ती रेल सेवा।
- ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत- किसानों, छात्रों और मजदूरों को लाभ।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा- व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर।
बंगाल नागपुर रेलवे से शुरू हुआ था सफर
- 17 अप्रैल 1886 को बंगाल नागपुर रेलवे ने रायपुर–राजिम–धमतरी रेल खंड पर स्टीम ट्राम-वे निर्माण की स्वीकृति दी।
- 1891–92 में रायपुर से धमतरी के बीच सर्वे शुरू हुआ।
- अक्टूबर 1896 में पटरियां बिछाने का काम शुरू हुआ।
- 1 अक्टूबर 1944 को बंगाल नागपुर रेलवे का प्रबंधन भारतीय रेलवे के अधीन आ गया।
- इसके बाद 14 अप्रैल 1952 को रायपुर–धमतरी रेलखंड औपचारिक रूप से पूर्व रेलवे के अधीन आ गया। इस तरह यह ऐतिहासिक रेल मार्ग पूरी तरह भारतीय रेलवे के प्रबंधन में आ गया।
66 लाख रुपए में बनी थी पूरी रेल लाइन
रायपुर–धमतरी नैरोगेज लाइन की योजना 19वीं सदी के अंतिम दौर में बनी थी। उस समय पूरी लाइन 66 लाख रुपए की लागत से तैयार की गई थी, जो उस युग में बड़ी रकम मानी जाती थी।
1900 में अलग-अलग चरणों में शुरू हुई ट्रेन सेवा
- रायपुर से कुरूद तक पहला खंड 10 सितंबर 1900 को शुरू हुआ।
- अभनपुर जंक्शन से राजिम के लिए सेवा 15 अक्टूबर 1900 को शुरू हुई।
- कुरूद से धमतरी तक ट्रेन 17 दिसंबर 1900 को चली।
- बाद में नवापारा से राजिम तक विस्तार किया गया, जो 13 मई 1906 को शुरू हुआ।
गुजरात के ठेकेदार राजा रुद्रा ने बनाया था रिकॉर्ड
इस ऐतिहासिक रेल लाइन के निर्माण का ठेका गुजरात के ठेकेदार राजा रुद्रा ने लिया था। कच्छ के गुर्जर क्षत्रिय बिरादरी के ठेकेदारों की देशभर में रेल लाइन बिछाने में बड़ी भूमिका रही है। राजा रुद्रा ने 1898 में काम शुरू कर महज दो साल में लाइन चालू कर दी, जो उस समय एक रिकॉर्ड माना गया। काम की रफ्तार देखकर अंग्रेज अफसर भी हैरान रह गए थे।
2017 में बंद हुई थी छोटी लाइन
करीब एक सदी तक सेवा देने के बाद रायपुर–धमतरी की नैरोगेज (छोटी लाइन) को साल 2017 में बंद कर दिया गया, ताकि इसे आधुनिक ब्रॉडगेज लाइन में बदला जा सके। अब लगभग आठ साल बाद यह मार्ग नए रूप में फिर से शुरू होने जा रहा है।
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