कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र स्थित इमली छापर बस्ती में रेलवे के मकान तोड़ने के नोटिस जारी किए जाने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया है। शुक्रवार दोपहर रेलवे कर्मचारियों के घरों पर निशान लगाए जाने और उन्हें खाली करने के निर्देश दिए जाने पर बड़ी संख्य
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प्रदर्शनकारियों ने पहले मुख्य सड़क को जाम करने का प्रयास किया। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें आम रास्ते से हटने की अपील की। पुलिस की समझाइश के बाद प्रदर्शनकारी ट्रक जाने वाली सड़क पर बैठ गए और यातायात बाधित किया।
कुछ देर बाद दर्री तहसीलदार भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने लोगों से बात की और रेलवे अधिकारियों तथा प्रशासन के साथ बैठक कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। तहसीलदार के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और लोग सड़क से हट गए।

प्रदर्शन के कारण गाड़ियों की लगी लाइन
प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे लोगों को आवाजाही में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले ही कोरबा के इंदिरा नगर दुरपा बस्ती में भी लगभग 250 घरों को रेलवे की ओर से नोटिस जारी किया गया था।
पहले रेलवे स्टेशन का घेराव किया था
तब भी आक्रोशित लोगों ने पहले रेलवे स्टेशन का घेराव किया था और अगले दिन शहर के पवन टॉकीज के पास तीन घंटे तक प्रदर्शन किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि जिला प्रशासन उन्हें रहने के लिए वैकल्पिक जगह और उचित मुआवजा दे, जिसके बाद ही वे घर खाली करने को तैयार होंगे।
तहसीलदार के आश्वासन के बाद वह प्रदर्शन भी समाप्त हुआ था। रेलवे घरों को हटाने की तैयारी में था, लेकिन विरोध के बाद फिलहाल कार्रवाई रोक दी गई है और समय आगे बढ़ा दिया गया है। इस समस्या का समाधान अभी लंबित है।
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