रायपुर1 घंटे पहले
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रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ये वीडियो 13 अप्रैल के आस-पास का बताया जा रहा है। वीडियो में PTRSU के फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर राजीव चौधरी, उनके स्टूडेंट और कुछ बाहरी लोग दिखाई दे रहे हैं।
बाहरी लोग यानी वो बच्चे जो डिपार्टमेंट या यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स नहीं हैं। लेकिन फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के एथलेटिक्स ग्राउंड में अभ्यास करने पहुंचे हुए थे। वीडियो में प्रोफेसर चौधरी और इन्हीं बाहरी बच्चों के बीच हॉट टॉक हुई है।
प्रोफेसर ने कहा कि, ब्रह्मा भी आ जाए तो वो उन्हें ग्राउंड का उपयोग करने नहीं देंगे। गवर्नर साहब, सीएम साहब जहां जाना है जाइए…मैं अपना फैसला नहीं बदलूंगा। आखिर में बच्चों को चेतावनी देते हैं कि वो ग्राउंड से बाहर नहीं गए तो FIR दर्ज कराएंगे।
लेकिन दिक्कत तब बढ़ी जब प्रोफसर चौधरी को वायरल वीडियो के कमेंट सेक्शन में चाकू मारने तक की धमकी दे दी गई। इसके बाद इस पूरे मामले में पुलिस में दो शिकायतें हुई हैं। पहली शिकायत फिजिकल डिपार्टमेंट्स के स्टूडेंट्स ने की है।
वहीं दूसरी शिकायत यूनिवर्सिटी के गार्ड्स ने की है। इस पूरे प्रकरण के बाद फिजिकल डिपार्टमेंट ने ये स्पष्ट का दिया है कि किसी गैर अधिकृत व्यक्ति को ग्राउंड में एंट्री नहीं दी जाएगी। ग्राउंड इस्तेमाल करने के लिए तयशुदा शुल्क अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही सेना भर्ती के नाम पर विश्वविद्याल के ग्राउंड में चल रही कार्मिशयल एक्टिविटी पर भी सख्त फैसले लिए जा सकते हैं। वहीं, प्रोफेसर को धमकी मिलने से नाराज स्टूडेंट्स ने सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रोटेस्ट भी किया है।
देखिए तस्वीरें…

प्रोफेसर ने कहा कि, ब्रह्मा भी आ जाए तो वो उन्हें ग्राउंड का उपयोग करने नहीं देंगे।

प्रोफेसर ने युवकों को चेतावनी देते हुए ग्राउंड से बाहर निकाल दिया।

प्रदर्शन के दौरान फिजिकल डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स।
इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे, आखिर 13 अप्रैल का विवाद क्या था? ग्राउंड को लेकर नियम क्या हैं? और पूरे मामले पर प्रोफसर राजीव चौधरी और उनके स्टूडेंट्स ने क्या कहा…
सबसे पहले जानिए वायरल वीडियो में क्या है ?
प्रोफेसर चौधरी वीडियो के शुरूआत में बाहरी बच्चों को अपने अचिवमेंट्स के बारे में बताते हुए कहतें हैं कि, खेल के क्षेत्र में उन्हें ज्ञान न दिया जाए। इसी बात पर एक लड़का कमेंट करता है – सर, हम ज्ञान नहीं दें रहें हैं। यहीं से बात और बिगड़ जाती है।
प्रोफसर चौधरी आगे कहते हैं कि, ब्रम्हा भी आ जाए तो वो उन्हें ग्राउंड का उपयोग करने नहीं देंगे। गवर्नर साहब, सीएम साहब जहां जाना है जाइए…मैं अपना फैसला नहीं बदलूंगा। आखिर में बच्चों को चेतावनी देते हैं कि वो ग्राउंड से बाहर नहीं गए तो FIR दर्ज कराएंगे।
अब इस वायरल वीडियो प्रोफेसर राजीव चौधरी का पक्ष पढ़िए
फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर राजीव चौधरी ने वायरल वीडियो के संबंध में दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि 13 अप्रैल की शाम यूनिवर्सिटी में बीपीएड और एमपीएड की क्लास चल रही थीं। इसी दौरान कुछ बाहरी लोग (जिन्हें प्रशासन “असामाजिक तत्व” कह रहा है) परिसर में प्रवेश कर गए।

समझाइश के बाद भी नहीं मानी बात, एडिटेड वीडियो वायरल हुआ
उन्हें समझाया गया, लेकिन प्रोफेसर चौधरी के अनुसार उन लोगों ने खुद को ऊपर तक पहुंच वाला बताया। सीएम, मंत्री, गवर्नर का नाम लेकर दबाव बनाने की कोशिश की इसी पर उन्होंने कहा कि “आप चाहें तो उनसे शिकायत कर दीजिए, लेकिन नियम नहीं टूटेंगे।”
आरोप है कि वीडियो का वही हिस्सा अपलोड किया गया, जिसमें प्रोफेसर चौधरी सख्त नजर आ रहें हैं। उन्होंने आगे बताया कि विवाद का मुख्य मुद्दा यह नहीं है कि बहस हुई। बल्कि ये है कि उन्होंने बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी है।

प्रोफसर चौधरी का आरोप है कि वीडियो का आधा हिस्सा की सोशल मीडिया पर डाला गया है।
शराब की बोतलें और आपत्तिजनक सामग्री मिली
दरअसल, फिजिकल ग्राउंड का इस्तेमाल बीते कई सालों से आम लोग और आस-पास के युवा करते आ रहे हैं। बहुत से ऐसे युवा जो फोर्स में एंट्री की तैयारी करते हैं, वो इसका इस्तेमाल करते हैं। फुटबॉलग्राउंड का उपयोग भी इसी तरह होता आ रहा है।
लेकिन अचानक रोक से विवाद की स्थिति उपजी है। अचानक रोक के सवाल पर प्रोफेसर चौधरी ने जवाब दिया कि यूनिवर्सिटी ने तय किया है कि बिना अनुमति कोई भी ग्राउंड इस्तेमाल नहीं करेगा। मैदान में टूटे कांच, बोतलें मिलने लगीं हैं। इससे उनके स्टूडेंटस को चोट आई हैं।
कुछ आपत्तिजनक गतिविधियां और सामग्री भी मैदान से मिली हैं। ऐसे में रोक अनुशासन और सुरक्षा के दृष्टिकोण से रोक लगाना पड़ा। इसके अलावा NCTE को यूनिवर्सिटी ने अंडरटेकिंग दी है कि स्पोर्ट्स सुविधाएं केवल छात्रों और अधिकृत लोगों के लिए होंगी।

ग्राउंड पर पड़ी शराब की बोतलें। (तस्वीर विश्चविद्यालय ने उपलब्ध कराई है)

फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के इसी मैदान को लेकर उपजा है विवाद।
तो क्या अब आम लोग ग्राउंड का उपयोग नहीं कर पाएंगे?
आम लोग ग्राउंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन डिपार्टमेंट अब किसी को कॉम्प्लिमेंट्री एंट्री नहीं देगा। ग्राउंड के किसी भी हिस्से को उपयोग करने के लिए फीस देनी होगी। दरअसल, साल 2024 में विश्वविद्यालय के 90वें कार्यपरिषद की बैठक में एक निर्णय लिया गया था।
इस निर्णय के अनुसार अर्न एंड लर्न के माध्यम से सेंटर फॉर स्पोर्टस स्किल डेवलेपमेंट की स्थापना की गई है। इसके तहत ग्राउंड में ट्रेनिंग करने और लेने के लिए फीस तय की गई है। यानी बाहरी लोग पूरी तरह बैन नहीं हैं, बल्कि उन्हें रजिस्ट्रेशन के जरिए एंट्री दी जाएगी।

कार्यपरिषद की बैठक के बाद जारी अधिसूचना की कॉपी।

अर्न एंड लर्न कांसेप्ट के तहत ही आम लोगों को प्रवेश मिलेगा।
अब फीस का गणित समझिए
विश्वविद्यालय की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, छात्रों के लिए डिफेंस फिटनेस ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स नर्सरी और योग-एरोबिक्स सेंटर संचालित किए जाएंगे। डिफेंस सर्विस की ट्रेनिंग के लिए ₹500 रजिस्ट्रेशन फीस और ₹750 प्रति माह शुल्क निर्धारित किया गया है।
इस कोर्स का समय सुबह 6 बजे से 7:30 बजे तक रखा गया है। इसके अलावा स्पोर्ट्स नर्सरी के तहत क्रिकेट, बैडमिंटन और टेनिस जैसे खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए ₹500 रजिस्ट्रेशन फीस और ₹1000 प्रति माह शुल्क तय किया गया है। प्रशिक्षण का समय दोपहर 3:30 बजे से 5:30 बजे तक निर्धारित है।

फीस के संबंध में जारी दस्तावेज।
एरोबिक्स और योग सेंटर की भी शुरुआत
इसके अलावा विश्वविद्यालय में एरोबिक्स और योग केंद्र भी संचालित किया जा रहा है। इसमें शामिल होने के लिए ₹500 रजिस्ट्रेशन फीस और ₹750 प्रति माह शुल्क देना होगा। इसका समय भी सुबह 6 बजे से 7:30 बजे तक रखा गया है।
इन गतिविधियों की निगरानी के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें प्रो. रीता वेणुगोपाल, प्रो. सी.डी. अगाशे और प्रो. राजीव चौधरी को शामिल किया गया है।
सोशल मीडिया पर चाकू से मारने की धमकी
वहीं, वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसी दौरान वीडियो के कमेंट सेक्शन में कुछ युवकों ने प्रोफेसर को धमकी भी दी है। चाकू मारने तक की बात कही गई है।
इसके अलावा कमेंट्स में कहा गया कि वे यूनिवर्सिटी के अंदर तो सुरक्षित रह सकते हैं, लेकिन बाहर उनकी सुरक्षा खतरे में हो सकती है। इसके बाद ही पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है।

सोशल मीडिया पर मिली धमकियां।
स्टाफ काउंसिल की ओर से FIR की सिफारिश, शिक्षक संघ ने भी की निंदा
इस घटना को गलत मानते हुए स्टाफ काउंसिल ने भी एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। प्रशासन से इसके लिए अनुमति भी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने भी इस घटना की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया है।
संघ का कहना है कि इस तरह की घटनाएं परिसर की सुरक्षा के लिए खतरा हैं इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। प्रशासन का यह भी कहना है कि इस पूरे मामले को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि सामाजिक शांति भंग करने की स्थिति बन गई।

स्टूडेंट्स की ओर से की गई शिकायत की कॉपी।

गार्ड की ओर से की गई शिकायत की कॉपी।
प्राइवेट अकैडमी वालों को भी देनी पड़ सकती है फीस
इस पूरे मामले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने ये भी नोटिस किया है कि कुछ प्राइवेट ट्रेनिंग संस्थान यूनिवर्सिटी ग्राउंड का उपयोग कर रहे हैं। वे छात्रों से पैसे लेते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी को कुछ नहीं देते। यूनिवर्सिटी को इसकी जानकारी दे दी गई है। ऐसे में संभव है कि कमर्शियल उपयोग कर रहें लोगों पर भी विश्वविद्यालय कार्रवाई कर सकता है।

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