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क्या आपने सुना है कि सांप और बिच्छुओं को कंट्रोल किया जा सकता है? क्या आपको पता है हमारे प्रदेश के अधिकारी सांप और बिच्छू को रास्ता बताएंगे और वे उसी रास्ते पर चलेंगे? नहीं न… लेकिन हमारे अफसरों ने ऐसा प्लान बनाया है। भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत
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104.25 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन सड़क की लागत 3150 करोड़ रुपए है। इस सड़क पर 122 जगहों पर सांप और बिच्छू के आने-जाने के लिए पाइप कल्वर्ट बनाया जाएगा। एनएचएआई 1.2 मीटर चौड़ी कांक्रीट की पाइप डालेगा। पाइप के माध्यम से सांप और बिच्छू आना-जाना कर सकेंगे।
एनएचएआई ने इसकी ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर ली है। टेंडर जारी कर एजेंसी तय हो गई है, लेकिन भू-अधिग्रहण के चलते इसका निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। एनएचएआई के अफसरों का मानना है कि भू-अधिग्रहण का काम पूरा हो गया है। लेकिन भू-स्वामियों को अभी तक पैसा नहीं मिल पाया है। क्योंकि कुछ भू-स्वामी बाहर हैं तो कई जगहों पर एक जमीन के कई हिस्सेदार हैं। विभाग जल्द ही इसका काम पूरा कर काम शुरू करेगा।
हाथियों की आवाजाही के लिए कुल 11 अंडरपास बनेंगे हाथी व दूसरे वन्य जीवों के लिए भी इस मार्ग पर 11 अंडरपास बनाए जाएंगे। इस फोरलेन हाइवे में 3.65 किमी में पहला अंडरपास, 9.6 किमी में दूसरा, 23.6 किमी में तीसरा, 30.820 किमी में चौथा, 35.500 किमी में पांचवां, 59.480 किमी में छठवां, 83.860 किमी में सातवां, 85.140 किमी में आठवां, 87.480 किमी में नौंवा, 88.060 किमी में दसवां और 88.920 ग्यारहवें अंडरपास का निर्माण होगा।
जानिए कितने मेजर ब्रिज बनेंगे 104 किमी की दूरी में कुल सात मेजर ब्रिज बनेंगे। ये ब्रिज नदी, नालों एवं बड़े जल निकायों के ऊपर बनाए जा रहे हैं। पहला मेजर ब्रिज 15.900 किमी की दूरी पर, दूसरा 31.882 किमी की दूरी पर प्रस्तावित है। इसके बाद 35.020 किमी, 37.482 किमी, 46.352 किमी, 77.930 किमी और अंतिम मेजर ब्रिज 104.075 किमी की दूरी पर बनेगा।
सांप के लिए हाईवे पर 20 एंट्री प्वाइंट
सांप के लिए हाईवे पर सड़क के नीचे पाइप लगाए जाएंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अफसर का कहना है कि अब फोरलेन सड़क निर्माण में छोटे-छोटे जीव-जंतुओं का भी ख्याल रखा जा रहा है। इसके साथ ही फोरलेन सड़क में हर 20 किलोमीटर में एंट्री पॉइंट होगा। एक्सेस कंट्रोल से बनने वाली इस फोरलेन सड़क में जितनी दूरी तय करेंगे, उतना ही टोल टैक्स देना पड़ेगा। एग्जिट और एंट्री पॉइंट में कैमरा भी लगा होगा।
भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत पत्थलगांव-कुनकुरी से झारखंड बार्डर तक फोर लेन हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। विभाग ने निर्माण एजेंसी नियुक्त कर दी है। परियोजना के तहत कई जगहों पर वन्यजीवों के आने जाने के लिए अंडरपास और छोटे जीवों के लिए कांक्रीट की पाइप कल्वर्ट का निर्माण किया जाएगा। -डीडी पार्लावर, परियोजना निदेशक, कोरबा
इधर, पानी से भरे गड्ढे में गिरे तीन हाथी, सुरक्षित निकाला
पिछले 10 साल में 167 हाथियों की मौत, 62 की मौत करंट लगने से
बारनवापारा अभयारण्य के हरदी गांव (कसडोल) के पास सोमवार को खेत में सिंचाई के बनाए गए गड्डे में रोहांसी दल के तीन हाथी गिर गए। इसकी सूचना पर वन विभाग की टीम ने जेसीबी की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। हाथियों के निकलने के लिए रैंप बनाया गया। दोपहर 12 बजे तक उन्हें सुरक्षित निकालकर जंगल में छोड़ दिया गया।
इधर, अभयारण्य क्षेत्र और जंगलों में वन्यजीवों के इलाकों में खुले गड्डों काे भरने और इनके चारों ओर दीवार खड़ी करने को लेकर रायपुर के नितिन सिंघवी ने साल 2018 में प्रधान मुख्य संरक्षक को पत्र लिखा था। इसके बावजूद इस ओर विभाग ने ध्यान नहीं दिया। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 10 साल में 167 हाथियों की मौत हो चुकी है। जबकि बिजली के करंट से 62 हाथियों की मौत हुई है।
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