दुर्ग जिले के अछोटी स्थित अभ्युदय संस्थान में चेतना विकास और मूल्य आधारित शिक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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कार्यशाला के दौरान मंत्री यादव ने शिक्षकों से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज में संस्कार, चेतना और सकारात्मक परिवर्तन का आधार है।
उन्होंने जोर दिया कि विकसित भारत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्यों को पाने के लिए नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा, जीवन मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स में धन धान्य कृषि योजना, पल्सेस मिशन और दलहन-तिलहन से जुड़ी 1100 परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इसका लाइव प्रसारण दुर्ग जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में दिखाया गया।

प्राचार्यों और शिक्षकों ने भी बताए अनुभव
मंत्री यादव ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब भावी पीढ़ी में ये गुण विकसित होंगे, तभी वे विकसित छत्तीसगढ़ और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दे पाएंगे।
इस कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार और मूल्य आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के तरीकों पर चर्चा की।
मंत्री यादव ने कहा कि एक स्वच्छ समाज की नींव सशक्त और संस्कारित शिक्षा प्रणाली पर ही टिकी होती है। स्कूलों में अनुशासन, संस्कार और सेवा भाव का वातावरण राष्ट्र को जागरूक और सशक्त बनाता है।

पीएम धन धान्य कृषि योजना का दुर्ग में शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा से पी.एम. धन धान्य कृषि योजना, पल्सेस मिशन और दलहन-तिलहन से जुड़ी 1100 परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दुर्ग जिले के कृषि विज्ञान केंद्र, पाहंदा (अ) में किया गया, जहां बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विजय जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए किसानों के लिए उनके लाभों पर प्रकाश डाला। डॉ. जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री की यह पहल कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

सभी ने अपने अनुभव साझा किए
मुख्य अतिथि सांसद विजय बघेल ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने जोर दिया कि पी.एम. धन धान्य कृषि योजना किसानों को नई तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करेगी।
तकनीकी सत्र में डॉ. ईश्वरी कुमार साहू ने धान फसल में होने वाले कीट एवं बीमारियों की रोकथाम के उपाय बताए। उन्होंने धन धान्य कृषि योजना के तहत कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों पर भी जानकारी दी।
किसानों को छत्तीसगढ़ को दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने हेतु चना, तिवड़ा, अरहर और सरसों जैसी फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि, बागवानी, पशुपालन, जैविक और प्राकृतिक खेती से संबंधित नवीन तकनीकों की भी जानकारी प्रदान की गई। इस आयोजन में 236 से अधिक किसानों ने भाग लिया और अपनी शंकाओं का समाधान मिला।
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