बीजापुर में खरीफ विपणन साल 2025-26 के लिए धान खरीदी को लेकर जिला प्रशासन के नए आदेश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की बात कही गई थी, लेकिन अब 15 क्विंटल से अधिक धान बेचने पर तहसीलदार का सत्यापन अनिवार्य क
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इस नए फरमान से क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश फैल गया है। गुरुवार (18 दिसंबर) को भोपालपट्टनम तहसील कार्यालय पर दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों किसान अपनी नाराजगी व्यक्त करने पहुंचे।

किसान बोले- बिना सत्यापन के धान नहीं बिक रहा
किसानों का कहना है कि गिरदावरी प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और कई किसानों की फसल में कटौती भी की गई है। इसके बावजूद नया आदेश थोपकर उन्हें तहसील के चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है।
कोंगुपल्ली, मद्देद, तारलागुड़ा, बारेगुड़ा, वरदल्ली और चेरपल्ली जैसे गांवों से 20-25 किलोमीटर दूर तहसील आना छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद कठिन है। जिन किसानों के टोकन पहले ही कट चुके हैं, वे भी सत्यापन के नाम पर परेशान हैं।
बिना सत्यापन के धान नहीं बिक रहा है, जिससे खरीदी केंद्रों पर अफरा-तफरी का माहौल है। किसानों ने इसे टोकन जारी होने के बाद अनावश्यक दबाव बताया।किसानों की समस्याओं को लेकर जिला सदस्य कविता कोरम सहित भाजपा नेताओं ने तहसीलदार से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि यह आदेश किसानों में असंतोष बढ़ा रहा है और इसे सरल बनाया जाना चाहिए। मुलाकात के दौरान तहसीलदार एसआईआर कार्य में व्यस्त थे, हालांकि कुछ किसानों के टोकन सत्यापित किए गए। बड़ी संख्या में किसान अभी भी सत्यापन के इंतजार में हैं।
जिला प्रशासन ने जारी किया था आदेश
कलेक्टर (खाद्य शाखा) ने 16 दिसंबर को यह आदेश जारी किया था, जिसमें प्रति एकड़ औसत 15 क्विंटल धान उत्पादन तय किया गया है। आदेश के अनुसार, 15 क्विंटल से अधिक धान विक्रय करने पर तहसीलदार द्वारा जांच की जाएगी।
साथ ही, जिन किसानों ने अपने कुल रकबे का 80 प्रतिशत से अधिक धान बेच दिया है, उनके शेष रकबे का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। किसान जिला खाद्य अधिकारी के इन निर्देशों से परेशान हैं और चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो वे आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे।
वे इस आदेश की वापसी या इसमें संशोधन की मांग कर रहे हैं। प्रभारी खाद्य अधिकारी दिलीप उईके ने इस संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पिछले सत्र में औसत उत्पादन 15 क्विंटल था और इसी आधार पर निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 15 क्विंटल से अधिक धान बेचने वाले किसानों को समिति द्वारा चिन्हित कर राजस्व अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। उईके ने किसानों से किसी भी भ्रम में न पड़ने की अपील करते हुए कहा कि अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी और सभी पात्र किसानों का धान नियमानुसार खरीदा जाएगा।
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