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बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक पारदर्शिता और ग्रामीणों को सीधे अधिकारियों से जोड़ने की पहल अब औपचारिकता बनकर रह गई है। कई ग्राम पंचायत सचिवालयों की दीवारों पर आज भी पुराने अधिकारियों के नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं, जबकि उनका तबा
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जिला प्रशासन ने यह व्यवस्था शासन की योजनाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की थी। शुरुआत में अधिकारी बदलने पर जानकारी अपडेट की जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह प्रक्रिया रुक गई है।
आठ अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर पुराने
वाड्रफनगर विकासखंड की ग्राम पंचायत लमोरी इसका एक प्रमुख उदाहरण है। यहां पंचायत भवन की दीवार पर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ, सीएमएचओ, एसडीएम, जनपद सीईओ, बीएमओ और तहसीलदार सहित आठ अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर वर्षों पुराने हैं। इनमें से कई अधिकारियों का तबादला हो चुका है।
नागरिकों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतें चाहें तो यह जानकारी तुरंत अपडेट करा सकती हैं, लेकिन इस ओर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इससे आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और पारदर्शिता का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।
कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी यही स्थिति
यह समस्या केवल लमोरी ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है। जिले की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी यही स्थिति है, जहां दीवारों पर आज भी वर्षों पुराने अधिकारियों की जानकारी दर्ज है।
इस स्थिति को देखते हुए, जिला प्रशासन को इस दिशा में फिर से सक्रियता दिखानी चाहिए। ग्राम पंचायतों को जानकारी अपडेट करने के निर्देश जारी किए जाने चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही की यह महत्वपूर्ण पहल अपनी सार्थकता बनाए रख सके।
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