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रेलवे फाटक पर राहगीरों की परेशानी कम नहीं हो रही। शुक्रवार को फिर तकनीकी खराबी के चलते रेलवे फाटक दो घंटे तक बंद रहा।
शुक्रवार दोपहर 2 बजे अचानक फाटक खुलना बंद हो गया, जिसके बाद कुछ ही देर में सिवनी साइड और सरखों रोड पर छोटी-बड़ी गाड़ियों की कतार बढ़ती चली गई। नैला की ओर भी फाटक के पास वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान स्कूली वाहन, एम्बुलेंस, दोपहिया, चारपहिया और मालवाहक वाहन जाम में फंसे रहे। मौके पर तैनात ट्रैफिक जवानों ने जाम को देखते हुए वाहनों को अंडरब्रिज की ओर डायवर्ट करना शुरू किया। वहीं रेलवे फाटक के केबिन में मौजूद कर्मियों ने स्टेशन मास्टर को फाटक में आई खराबी की जानकारी दी। ट्रैफिक पुलिस की सूचना पर रेलवे विभाग की ओर से मैकेनिक टीम फाटक पहुंची। तकनीकी खराबी दूर करने शाम तक मरम्मत चलती रही। लोगों ने नाराजगी जता रेलवे प्रशासन से स्थायी समाधान और जल्द आरओबी निर्माण की मांग दोहराई।
मार्च तक शुरू नहीं हुआ, तो फिर नए सिरे से होगी प्रक्रिया: यदि चालू सत्र में परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली और काम शुरू नहीं हुआ, तो मामला उलझ सकता है। बजट की वैधता दो साल तक ही होती है। मार्च तक निर्माण शुरू नहीं होने पर प्रक्रिया गड़बड़ा सकती है। ऐसे में फिर से नए सिरे से मंजूरी, बजट और प्रक्रिया करनी पड़ेगी, जिसमें दो साल तक का समय और लग सकता है। विधायक ब्यास कश्यप के अनुसार सेतु निगम के अफसरों ने जल्द ही निरीक्षण के बाद निर्माण शुरू करने का आश्वासन दिया है। यदि इस सत्र में भी आरओबी पर ठोस प्रगति नहीं हुई, तो आंदोलन करेंगे। जनता की पीड़ा चरम पर है और केवल कागजी सर्वे व निरीक्षण से समस्या हल नहीं होगी। उनका आरोप है कि सरकार आयोजनों में करोड़ों खर्च कर रही है, पर जिले की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जांजगीर-नैला रेलवे फाटक पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज को लेकर सालों से चल रही प्रक्रिया फिर सर्वे और स्थल निरीक्षण के फेर में फंसती नजर आ रही है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बातचीत के अनुसार अब तक दो से तीन बार सर्वे हो चुका है। नक्शे भी तैयार कर लिए हैं, पर निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। पहले जिस डिजाइन पर आरओबी प्रस्तावित था, उसमें बदलाव कर नया नक्शा तैयार किया गया है। इसी नए नक्शे के आधार पर सेतु निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को स्थल निरीक्षण करना है। निरीक्षण नहीं होने के कारण ही पूरा मामला अटका हुआ है। सेतु निगम का कहना है कि उनका खाका तैयार है, टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। ठेकेदार की ओर से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए हैं, लेकिन अंतिम स्तर पर उच्च अधिकारियों की रुचि और निरीक्षण के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
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