छत्तीसगढ़

महतारी दुलार योजना में ठहराव, तीन साल से नहीं मिली छात्रवृत्ति और फीस की राशि, 15 करोड़ अटके

कोरोना महामारी के दौरान बेसहारा हुए बच्चों के लिए शुरू की गई महतारी दुलार योजना में अब ठहराव आ गया है। पिछले तीन वर्षों से इन बच्चों को सरकारी छात्रवृत्ति और सहयोग फीस की राशि नहीं मिल पाई है। इस कारण लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है।

लोक शिक्षण संचालनालय ने पात्रता और अपात्रता की जांच के लिए संभागीय कार्यालयों को जिम्मेदारी दी है, जो कि जांच में देरी कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही भुगतान किया जाना है, जिससे राशि लंबित पड़ी हुई है।

यह योजना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भूपेश बघेल द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य माता-पिता या अभिभावक खो चुके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान करना था।

महतारी दुलार योजना के तहत कक्षा पहली से 8वीं तक के विद्यार्थियों को 500 रुपये प्रति माह और कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को 1000 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति देने का प्रविधान है। इसके साथ ही, पंजीकृत पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को सालाना 5000 रुपये और नौवीं से 12वीं कक्षा के बच्चों को 10000 रुपये की छात्रवृत्ति देने का प्रविधान है।

योजना का उद्देश्य उन विद्यार्थियों की सहायता करना है, जिनके माता-पिता या दोनों की कोरोना के कारण मृत्यु हो चुकी है और जिनके पास कोई अन्य कमाने वाला नहीं है। राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए निजी स्कूलों में अध्ययनरत होने पर उनकी फीस का भुगतान करने का निर्णय लिया है।

कुछ बच्चों को राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में प्राथमिकता दी गई थी, जबकि अन्य बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से आधे बच्चों ने फीस न चुका पाने के कारण निजी स्कूल छोड़ दिए हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय के छात्रवृत्ति प्रभारी बजरंग प्रजापति ने बताया कि पिछले साल जिन बच्चों का पंजीकरण नहीं हो पाया था, उनका नवीनीकरण जारी है। संभाग स्तर पर इस छात्रवृत्ति योजना की जांच की जा रही है और जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से महतारी दुलार योजना की राशि नहीं मिल पाई है। कुछ स्थानों पर स्कूलों द्वारा बच्चों से फीस मांगने की शिकायतें आई हैं, जिसके कारण कई बच्चों ने स्कूल छोड़ दिए हैं।

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