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महासमुंद में तीन लोगों ने लिया देहदान का संकल्प, मृत्यु के बाद चिकित्सा शिक्षा-शोध को देंगे शरीर

महासमुंद में तीन लोगों ने देहदान का संकल्प लिया है। इनमें पर्यवेक्षक शीला प्रधान, आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक निलेश खांडे और उनकी पत्नी चित्ररेखा तारक शामिल हैं। तीनों ने मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए देने का फैसला किया है।

शीला प्रधान ने अपना देहदान घोषणा-पत्र कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को सौंपा। उन्हें सेवा सेतु शिविर कोसरंगी में सम्मानित किया गया। शीला प्रधान ने कहा कि मृत्यु के बाद उनका शरीर पढ़ाई और अनुसंधान के काम आ सके, तो यह उनके लिए बड़ी बात होगी।

निलेश खांडे और चित्ररेखा तारक ने तुमगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर में देहदान का संकल्प लिया और संकल्प-पत्र भरा। यह दंपती पहले ही नेत्रदान का संकल्प ले चुका है। निलेश 47 बार और चित्ररेखा 6 बार रक्तदान कर चुके हैं।

देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। मेडिकल विद्यार्थी दान किए गए शरीर से मानव शरीर की बनावट को समझते हैं। इससे चिकित्सा शोध और नई उपचार तकनीकों के विकास में भी मदद मिलती है। एक व्यक्ति का देहदान भविष्य के चिकित्सकों के ज्ञान को समृद्ध करने के साथ मरीजों के उपचार में भी अप्रत्यक्ष योगदान दे सकता है।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने शीला प्रधान और निलेश खांडे-चित्ररेखा दंपती के निर्णय की सराहना की। उन्होंने इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शिल्पा साय सहित अन्य अधिकारियों ने भी दंपती के संकल्प की प्रशंसा की।

तीनों के इस फैसले से संदेश मिलता है कि सेवा केवल जीवन तक सीमित नहीं है। देहदान के जरिए व्यक्ति अपनी अंतिम विदाई के बाद भी चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों के उपचार में योगदान दे सकता है।

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