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कृषि कर्मचारियों के वेतनमान मामले में हाई कोर्ट का सरकार को निर्देश, 5 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करना होगा विस्तृत प्रस्ताव

कृषि विभाग के कर्मचारियों के वेतन और अन्य पारिश्रमिक में बढ़ोतरी के मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। संदीप लकड़ा बनाम यूनियन आफ इंडिया समेत 100 से अधिक याचिकाओं के संयुक्त बैच पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं के वेतनमान में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

मामले की सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीपाली पांडेय उपस्थित हुईं। वहीं केंद्र और राज्य सरकार की ओर से डिप्टी सालिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा, अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय, शासकीय अधिवक्ता शैलजा शुक्ला सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।

हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में कृषि संचालक, जिला रायपुर राहुल देव वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान वेतन और पारिश्रमिक में वृद्धि के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ताओं के वेतनमान में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

कोर्ट ने सरकार की ओर से दी गई जानकारी को केवल मौखिक आश्वासन तक सीमित नहीं रखा। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने सरकार को निर्देश दिया कि वेतनमान में संशोधन के प्रस्ताव का विस्तृत विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रस्ताव को लिखित रूप में दाखिल करना होगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस तरह का संशोधन किया जा रहा है।

हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के वेतनमान में प्रस्तावित संशोधन के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव पांच अक्टूबर 2026 तक कोर्ट में दाखिल किया जाए। इससे अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि सरकार वेतनमान में किस तरह का संशोधन प्रस्तावित कर रही है और उसका लाभ किन कर्मचारियों को किस आधार पर दिया जाना है।

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि इन याचिकाओं के अलावा सात अन्य मामले भी इसी मुद्दे से संबंधित हैं। हालांकि ये सात मामले वर्तमान बैच के साथ इसी बेंच को आवंटित नहीं किए गए हैं। इस पर हाई कोर्ट ने इन सातों मामलों को उचित आदेश के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष रखने का निर्देश दिया है, ताकि इनकी लिस्टिंग के संबंध में निर्णय लिया जा सके।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि चीफ जस्टिस के स्तर से लिस्टिंग संबंधी आदेश के बाद सभी संबंधित मामलों को पांच अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। फिलहाल हाई कोर्ट ने वेतनमान में बढ़ोतरी को मंजूरी देने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। सरकार को पहले अपने प्रस्ताव का विस्तृत स्वरूप अदालत के सामने रखना होगा। इसके बाद ही कोर्ट आगे का निर्णय लेगा।

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