कोंडागांव जिले के नवगठित ग्राम पंचायत चांगेर के आश्रित ग्राम कोडेनार के ग्रामीण आज भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति और विकास के दावों के बावजूद, यह गांव पिछले पचास सालों से ज्यादा समय से अंधेरे में डूबा हुआ है।
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ग्रामीणों का कहना है कि पचास सालों से उनके घरों में बिजली नहीं पहुंची है। गांव के बुजुर्ग हर दिवाली पर बिजली आने की उम्मीद करते हैं, लेकिन हर साल उनकी यह उम्मीद अधूरी रह जाती है। अधिकारी केवल आश्वासन ही देते है।

आश्वासन देकर लौटते है अधिकारी
ग्राम कोडेनार के रहने वाले मेसा, बुलमति सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई, रात की सुरक्षा और घर के दैनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित होते हैं। बरसात के मौसम में घना अंधेरा होने के कारण सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन को आवेदन दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में न तो बिजली के खंभे लगाए गए हैं और न ही बिजली लाइन बिछाई गई है। बिजली विभाग के अधिकारी केवल आश्वासन देकर लौट जाते हैं, जिससे ग्रामीणों में निराशा है।

कोडेनार गांव में कब पहुंचेगी बिजली
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार हर गांव में बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है, तो कोडेनार गांव को क्यों अंधेरे में रखा गया है। उन्होंने शासन से जल्द से जल्द ग्राम कोडेनार तक विद्युत लाइन पहुंचाने की मांग की है, ताकि यह गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके और अगली दिवाली तक उनके घरों में भी उजाला हो सके।
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