कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक का ‘जुगानी कैंप’ गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। करीब 125 परिवारों और 1000 से अधिक मतदाताओं वाला यह गांव क्षेत्र में सर्वाधिक दूध उत्पादन करता है, लेकिन यहां न पशु चिकित्सालय है और न ही मानव स्वास्थ्य केंद्र।
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‘जुगानी कैंप’ में लगभग हर घर में गाय-भैंस पाली जाती हैं। यहां एक डेयरी भी संचालित है और आसपास के बाजारों में सबसे ज्यादा दूध इसी गांव से जाता है। इसके बावजूद पशु चिकित्सा सुविधा पूरी तरह से शून्य है, जिससे पशुधन का इलाज एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीण विश्वनाथ सिकदार, बबलू मंडल और तापस सरकार ने बताया कि “हम सबसे ज्यादा दूध देते हैं, पर हमारे पशुओं के इलाज का कोई इंतजाम नहीं है। बीमार पशु को 2-3 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है या अपनी जेब से निजी डॉक्टर बुलाना पड़ता है। यह सरासर अन्याय है।”

पशु चिकित्सा केंद्र पूरी तरह बंद
ग्रामीणों के अनुसार, दंडकारण्य परियोजना के समय यहां एक पशु चिकित्सा केंद्र हुआ करता था। हालांकि, वह केंद्र अब पूरी तरह से बंद हो चुका है और केवल ‘इतिहास’ का हिस्सा बनकर रह गया है। गांव के लोगों की समस्या यहीं खत्म नहीं होती। कभी यहां एक उप स्वास्थ्य केंद्र भी था, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन टूट गया है और एएनएम की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।
इलाज के लिए 3 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है ग्रामीणों को
अब ग्रामीणों को इलाज के लिए 3 किलोमीटर दूर जुगानी कलार जाना पड़ता है। सुभाष मंडल, रितेश राय और संजु हालदार जैसे ग्रामीणों ने बताया, “हमें दंडकारण्य प्रोजेक्ट के तहत यहां बसाया गया था। तब चिकित्सा केंद्र और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं। प्रोजेक्ट खत्म होते ही सब कुछ छिन गया। अब हमें आसपास की पंचायतों पर निर्भर रहना पड़ता है।”
बता दें कि ‘जुगानी कैंप’ की सबसे बड़ी प्रशासनिक समस्या यह है कि यह गांव तीन पंचायतों – जुगानी कलार, कुल्हाड़गांव और चुरेगांव – के अधीन एक आश्रित ग्राम है।
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