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महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन गठित जिला बाल संरक्षण समिति एवं अन्य अनुशांगिक समितियों की कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने सोमवार को बैठक ली। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को परस्पर समन्वय स्थापित कर लंबित प्रकरणों को शीघ्र निराकृत करने कहा। इसके साथ ही विभिन्न अधोसंरचना निर्माण एवं सुविधाओं में विस्तार के लिए आवश्यकतानुसार कार्यवाही करने की बात कही।
त्रैमासिक समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने कहा महिला व बाल विकास विभाग के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, आदिवासी विकास, ग्रामीण विकास एवं अन्य संबंधित विभाग शासन द्वारा सौंपे गए दायित्वों का बेहतर ढंग से क्रियान्वयन करें। इसके साथ ही लंबित प्रकरणों का जल्द से जल्द निराकरण करें। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विपिन जैन ने एजेंडावार विषयों का वाचन करते हुए 19 सितंबर को आयोजित बैठक में लिए गए फैसले तथा पालन प्रतिवेदन की जानकारी दी। उन्होंने किशोर न्याय बोर्ड में लंबित प्रकरण, बालक कल्याण समिति में पाक्सो अधिनियम के तहत प्रकरण के विरूद्ध की गई कार्यवाही की जानकारी दी। इसके अलावा राज्य शासन के निर्देशानुसार बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत अंतरविभागीय समन्वय से की जा रही कार्यवाही की जानकारी दी।
297 व 5 नगरीय निकाय का बाल विवाह मुक्त घोषित करने का प्रस्ताव: उन्होंने बताया जिले में प्राप्त लक्ष्य से अधिक 297 ग्राम पंचायतों व 5 नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किए जाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। इसी तरह बैठक में बाल संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों का चिन्हांकन, मिशन वात्सल्य योजना के तहत जिले में स्वीकृत नवीन बालगृह (बालक) व बाल संप्रेक्षण गृह के संचालन, विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी, बाल गृह (बालिका) सिंगारभाट में सुविधाओं का विस्तार करने, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनाथ एवं परित्यक्त बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत स्कूलों में प्रवेश देने के संबंध में अब तक की गई कार्यवाही के बारे में कलेक्टर को अवगत कराया। इसके अलावा किशोर न्याय बोर्ड, बालक कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्प लाइन में लंबित प्रकरणों की जानकारी दी गई। इस पर कलेक्टर ने सभी लंबित प्रकरणों का शीघ्रता से निराकरण करने कहा।
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