बिना सर्वे और सुनवाई के बेदखल नहीं कर सकेगा नगर-निगम:बिलासपुर के 121 छोटे-कारोबारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, कहा- 90 दिन के भीतर फैसला लें निगम प्रशासन

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स को बेदखल करने से पहले सर्वे और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। जस्टिस एके प्रसाद ने नगर निगम बिना वैधानिक सर्वे और प्रभावित दुकानदारों का पक्ष सुने बिना उन्हें अपनी जगह से नहीं हटा सकता। कोर्ट ने बिलासपुर के 121 छोटे कारोबारियों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देते हुए 90 दिनों के भीतर बेदखली आदेश पर फैसला लेने कहा है। तब तक याचिकाकर्ताओं को दी गई अंतरिम राहत बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट के इस फैसले से कोनी में ठेला व गुमटी लगाने वाले व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, नगर निगम के जोन क्रमांक 8 के तहत कोनी क्षेत्र में गुमटी और ठेला लगाकर कारोबार करने वाले 121 स्ट्रीट वेंडरों को बेदखली नोटिस जारी किया गया था। इस आदेश को कोनी व्यापारी कल्याण संघ ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें बताया गया कि कोनी क्षेत्र में लगभग 121 छोटे दुकानदार लंबे समय से अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं। ये दुकानें नाली के पीछे और मुख्य सड़क से लगभग 10 से 15 फीट की दूरी पर हैं, जिससे यातायात में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं होती। बिना सर्वे व सुनवाई का मौका दिए बेदखली नोटिस
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इसके बावजूद निगम प्रशासन ने बिना कोई कानूनी सर्वे किए और बिना वेंडिंग जोन चिन्हित किए सीधे दुकानें हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिया। स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट 2014 की धारा 3 और राज्य की 2016 की नियमावली के तहत जब तक वेंडरों का अनिवार्य सर्वे पूरा नहीं हो जाता और उन्हें वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी नहीं कर दिया जाता, तब तक किसी भी स्ट्रीट वेंडर को बेदखल या विस्थापित नहीं किया जा सकता। संघ ने निगम से वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। दुकानों को दूसरी जगह ले जाने का फैसला
नगर निगम की ओर से कहा गया कि निगम ने दुकानदारों को तुर्काडीह पुल के पास वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित करने का फैसला पहले ही ले लिया था। दावा किया कि दुकानदारों ने सहमति भी दी थी, लेकिन वे अब नई जगह पर शिफ्ट होने को तैयार नहीं हैं। वहीं, शासन की ओर से कहा गया कि यह विवाद पूरी तरह से नगर निगम के नोटिस और कार्रवाई से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा- पहले नियमों के तहत सर्वे कराएं
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि निगम प्रशासन सबसे पहले कानून के तहत सभी 121 वेंडरों का विधिवत सर्वे कराए, उनके लिए उचित वेंडिंग जोन का निर्धारण करे और फिर नियमानुसार उनके पुनर्वास या जगह आवंटन पर विचार करे। हर दुकानदार को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए और आदेश की कॉपी मिलने के 90 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी की जाए। जानिए क्या है स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 देश भर के रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाने वाले छोटे कारोबारियों को कानूनी सुरक्षा देने वाला कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य वेंडरों को प्रशासनिक उत्पीड़न और मनमाने ढंग से की जाने वाली बेदखली से बचाना है। अधिनियम की धारा 3 के अनुसार स्थानीय निकायों के लिए सभी स्ट्रीट वेंडरों का अनिवार्य सर्वे कराना और उन्हें वेंडिंग सर्टिफिकेट व पहचान पत्र जारी करना अनिवार्य है। इसके तहत शहरों में वेंडिंग और नॉन-वेंडिंग जोन तय करने का प्रावधान है। यदि किसी वजह से वेंडरों को हटाना जरूरी हो, तो उन्हें पहले उचित नोटिस देना और वैकल्पिक स्थान पर पुनर्वासित करना अनिवार्य होता है। इस पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए टाउन वेंडिंग कमेटी गठित करने का नियम है, जिसमें 40 प्रतिशत भागीदारी स्ट्रीट वेंडरों की होती है।
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