बिलासपुर35 मिनट पहलेलेखक: राम प्रताप सिंह
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प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वार्षिक पद्धति की परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। साथ ही विश्वविद्यालय सेमेस्टर परीक्षाओं के परिणाम भी घोषित कर रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने अब तक 57 परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं।
इसी प्रकार शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के परिणाम भी लगातार जारी हो रहे हैं। हालांकि, इन परिणामों में एक चिंताजनक रुझान देखने को मिल रहा है।
अधिकांश छात्र आंतरिक परीक्षाओं के अंकों के आधार पर उत्तीर्ण हो रहे हैं। मुख्य परीक्षा में छात्रों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ है। स्थिति यह है कि छात्र 32 पन्नों की उत्तरपुस्तिका तक नहीं भर पा रहे हैं। मेधावी छात्रों को छोड़कर अधिकांश की कॉपियों में 5 से 10 पन्ने खाली मिल रहे हैं।
भास्कर एक्सपर्ट
प्रो. रोहिणी प्रसाद, पूर्व कुलपति संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी, सरगुजा
डिजिटल पढ़ाई और शॉर्टकट का असर: छात्र शॉर्टकट के शिकार हो गए हैं। मोबाइल और कंप्यूटर से पढ़ाई का असर मुख्य परीक्षाओं में दिखने लगा है। आज के युवाओं में अध्ययन के प्रति वह गंभीरता नहीं दिख रही है जो पहले होती थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के साथ ही स्नातकोत्तर के साथ अब स्नातक स्तर पर भी सेमेस्टर सिस्टम प्रभावी हो गया है।
विषयों के विकल्प तो बढ़े हैं, लेकिन पढ़ाई और परीक्षा के पैटर्न में भी बदलाव आया है। सेमेस्टर सिस्टम के कारण पाठ्यक्रम छोटा हो गया है और साल में दो बार आंतरिक परीक्षाएं हो रही हैं। जिस आंतरिक परीक्षा में छात्र अधिक अंक प्राप्त करता है, उसे विश्वविद्यालय को भेजा जाता है।
परीक्षा पैटर्न और छात्रों की चुनौतियां: स्नातक स्तर पर अब 1-1 अंक के 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न, 5-5 अंकों के 4 लघु उत्तरीय प्रश्न और 10-10 अंकों के 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं। वहीं पीजी में 12-12 अंकों के 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं। प्रश्नों के सामने शब्द सीमा भी निर्धारित होती है, लेकिन छात्र इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
लिखने का अभ्यास कम होने के कारण छात्रों की गति नहीं बन पा रही है। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर लिखते समय उनकी हैंडराइटिंग बिगड़ने लगती है। साथ ही ज्ञान की कमी भी देखी जा रही है। छात्र प्रश्न से संबंधित सामान्य जानकारी लिखने में समय गंवा देते हैं, जिससे मूल उत्तर अधूरा रह जाता है।
कोरोना काल से पहले सप्लीमेंट्री की थी मांग, अब 32 पन्नों की कॉपी भी ज्यादा: अटल बिहारी वाजपेयी विवि, शहीद नंदकुमार पटेल विवि और पं. सुंदरलाल शर्मा विवि में वर्तमान में 32 पन्नों की उत्तरपुस्तिका दी जा रही है। अटल विवि में पहले यह 24 पन्नों की होती थी।
कोरोना काल से पहले छात्र परीक्षा में 2 से 3 सप्लीमेंट्री कॉपियां लेकर लिखते थे। कई बार सप्लीमेंट्री कॉपी धागे से बांधने पर निकल जाती थी, जिससे रिजल्ट प्रभावित होता था। इसे देखते हुए विवि ने मुख्य उत्तरपुस्तिका के पन्ने बढ़ाकर 32 कर दिए और सुरक्षा के लिहाज से स्टेपल की जगह सिलाई अनिवार्य कर दी, ताकि पन्ने बदले न जा सकें।
गाइड और कंप्यूटर से पढ़ाई का दुष्प्रभाव, किताबों और लेखन से दूरी बनी बाधा: ऑनलाइन सिस्टम आने के बाद छात्रों की कक्षाओं में उपस्थिति कम हुई है। जो छात्र कॉलेज आ भी रहे हैं, उनके पास संदर्भ पुस्तकें नहीं होतीं। लाइब्रेरी से किताबें इशू कराने का चलन भी कम हुआ है।
छात्र या तो इंटरनेट से पढ़ रहे हैं या परीक्षा के समय गाइड का सहारा ले रहे हैं। इस कारण विषय पर उनकी पकड़ मजबूत नहीं हो पा रही है। लिखने की आदत छूटने से परीक्षा के दौरान उनकी गति धीमी हो जाती है और वे सभी प्रश्नों को हल नहीं कर पाते।

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