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Home » High Court said that it is no longer possible to mend the relationship and granted the divorce | पत्नी ने पीरियड्स की समस्या छिपाकर शादी की: बोली- बताती तो शादी नहीं होती, कोर्ट ने कहा- यह धोखा है, तलाक मंजूर – Chhattisgarh News
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High Court said that it is no longer possible to mend the relationship and granted the divorce | पत्नी ने पीरियड्स की समस्या छिपाकर शादी की: बोली- बताती तो शादी नहीं होती, कोर्ट ने कहा- यह धोखा है, तलाक मंजूर – Chhattisgarh News

By adminDecember 11, 2025No Comments4 Mins Read
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी है। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी ने पीरियड्स नहीं आने की बात छिपाकर शादी की। यह उसके साथ मानसिक क्रूरता के समान है।

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इस मामले में जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि दंपती के बीच रिश्ता सुधारना अब संभव नहीं है। कोर्ट ने तलाक का फैसला बरकरार रखा है। साथ ही पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को 4 महीने के अंदर 5 लाख एकमुश्त स्थायी भरण-पोषण के रूप में दे।

पति ने बताया कि एक दिन पत्नी ने उसे कहा कि उसकी माहवारी रुक गई है। वह उसे डॉक्टर के पास ले गया, जहां पता चला कि पत्नी को पिछले 10 साल से पीरियड्स नहीं आ रहे हैं। आगे की जांच में गर्भधारण में गंभीर समस्या सामने आई।

पति का आरोप था कि पत्नी और उसके परिवार ने यह जानकारी शादी से पहले जानबूझकर छिपाई। पत्नी का कहना था कि अगर वह यह बात पहले बता देती, तो पति शादी से इनकार कर देता। इसलिए उसने यह जानकारी साझा नहीं की।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, कवर्धा के रहने वाले दंपती की शादी 5 जून 2015 को हिंदू रीति रिवाज से हुई थी। शुरुआती 2 महीनों तक संबंध सामान्य रहे, लेकिन इसके बाद विवाद शुरू हो गए। पति ने फैमिली कोर्ट में दावा किया कि पत्नी ने घर के बुजुर्ग माता-पिता और भतीजे-भतिजियों की जिम्मेदारी लेने पर आपत्ति शुरू कर दी।

वह अक्सर कहती थी, ‘क्या अनाथालय खोल रखा है?’ और घर के अन्य सदस्यों के लिए खाना बनाने से भी मना कर देती थी। इसके अलावा, पति का आरोप था कि पत्नी उसके परिवार के लिए असम्मानजनक व्यवहार करती थी और छोटी-छोटी बातों पर झगड़े करती थी। कई बार समझाने के बावजूद उसका रवैया नहीं बदला।

फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया था। पत्नी ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती।

फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया था। पत्नी ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती।

पत्नी के भाई को 40 हजार नहीं देने पर घर छोड़ा

पति ने यह भी कहा कि पत्नी के भाई ने उससे 40 हजार रुपए मांगे। जब वह रकम नहीं दी, तो पत्नी ने उससे बात करना और भोजन करना बंद कर दिया। आखिरकार उसने 40 हजार रुपए पत्नी के भाई के खाते में ट्रांसफर किए।

वहीं, पत्नी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दहेज में उसके पिता ने टीवी, फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, सोफा, बेड और सोने-चांदी के गहने दिए थे। शादी के बाद घर की नौकरानी को काम से हटा दिया गया और सभी घरेलू काम उनसे कराए गए।

पत्नी ने दावा किया कि उसे ‘बांझ’ कहकर प्रताड़ित किया जाता था। पत्नी ने कहा कि उसकी मेडिकल समस्या अस्थायी थी और डॉक्टरों ने दवाइयों और योग से समस्या ठीक होने की संभावना जताई थी।

पत्नी की अपील हाईकोर्ट ने खारिज की

इस मामले में फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया। बाद में पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिस पर कोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए तलाक के फैसले को बरकरार रखा और पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को 4 महीने के अंदर भरण-पोषण के लिए 5 लाख रुपए दे।

…………………………..

यह खबर भी पढ़ें…

हाईकोर्ट बोला- बिना प्रमाण नपुंसक कहना मानसिक क्रूरता: पत्नी ने कहा था- पति यौन संबंध बनाने में असमर्थ, फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त, तलाक मंजूर

पत्नी ने पहले पति के चरित्र पर लगाया आरोप फिर बिना मेडिकल प्रमाण के बताई नपुंसक।

पत्नी ने पहले पति के चरित्र पर लगाया आरोप फिर बिना मेडिकल प्रमाण के बताई नपुंसक।

‘किसी व्यक्ति पर बिना मेडिकल प्रमाण के नपुंसकता का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस तरह का गंभीर आरोप केवल मान-सम्मान नहीं, बल्कि पति के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है। पति पर दूसरे महिला के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाना भी क्रूरता है।’ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को त्रुटिपूर्ण माना और पति के तलाक की अपील को मंजूर कर ली है। मामला जांजगीर-चांपा जिले का है। पढ़ें पूरी खबर…



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