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दुर्ग में साढ़े 4 साल की मासूम से दुष्कर्म, हत्या की कोशिश के आरोपी को उम्रकैद; 153 दिनों में सुनाया फैसला

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साढ़े 4 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या की कोशिश के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी धनेश्वर साहू उर्फ जनता (40) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला वारदात के 153 दिन बाद आया है। मामला उतई थाना क्षेत्र के बंजारीपारा का है।

जानकारी के मुताबिक, 10 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 11.30 बजे बच्ची अपनी दादी से 5 रुपए लेकर घर के पास की दुकान पर खाने का सामान खरीदने गई थी। इसी दौरान आरोपी धनेश्वर साहू उसे बहला-फुसलाकर अपने घर की छत पर ले गया। दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में बच्ची को आरोपी अपने साथ ले जाता दिखाई दिया।

वहां दरिंदगी के बाद आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाया और गला घोंटकर उसे मारने की कोशिश की। बच्ची बेहोश हो गई तो उसे मरा समझ लिया। सबूत छिपाने के लिए उसने बच्ची को तकिया कवर और जूट के बोरे में बंद कर खंडहर में फेंक दिया। हालांकि, बच्ची की सांसें चल रही थीं।

काफी देर तक बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिवार और मोहल्ले के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान खंडहर में बोरे से बच्ची का पैर बाहर निकला देख मोहल्ले के 2 युवकों को शक हुआ। उन्होंने बोरा खोला तो मासूम लहूलुहान हालत में मिली। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के बाद वह फिलहाल ठीक है। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने थाने का घेराव कर हंगामा भी किया था।

उतई पुलिस ने शिकायत के बाद सीसीटीवी के आधार पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को दूसरे दिन कोर्ट में पेश किया गया। जांच पूरी करने के बाद 25 अप्रैल को चालान पेश कर दिया गया। इसके बाद 25 सितंबर यानी वारदात के 153 दिन बाद कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। 26 सितंबर को सजा का आदेश जारी किया गया।

आरोपी को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास के साथ 7 साल, 10 साल और 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। अलग-अलग धाराओं में कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

पुलिस के अनुसार आरोपी धनेश्वर साहू उर्फ जनता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 और 65(2) के तहत कार्रवाई की गई। इसके साथ ही लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5(ड) के साथ धारा 6 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) भी लगाई गई थी।

पुलिस को आरोपी के घर से बाल, तकिया कवर, जूट की बोरी, बच्ची के कपड़े और आरोपी के कपड़े मिले थे। इनका फोरेंसिक जांच और डीएनए मिलान कराया गया। जांच में मिले सबूतों ने आरोपी को घटना से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। बच्ची के शरीर, जांघ और गले पर खरोंच के निशान, अंदरूनी चोट और ज्यादा खून बहने की बात भी चिकित्सकीय जांच में सामने आई।

साढ़े 4 साल की बच्ची ने कोर्ट में पर्दे के पीछे खड़े आरोपी धनेश्वर साहू को पहचान लिया और अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। सीसीटीवी, डीएनए, चिकित्सकीय जांच और बच्ची की गवाही समेत कई अहम सबूतों के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी माना। अपर सत्र न्यायाधीश की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को मासूम से दुष्कर्म, हत्या की कोशिश और साक्ष्य छिपाने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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