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Home » Durg Police inducted two modern drones | दुर्ग पुलिस में दो आधुनिक ड्रोन शामिल: 5 किमी तक निगरानी, भीड़ नियंत्रण में मिलेगी मदद – durg-bhilai News
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Durg Police inducted two modern drones | दुर्ग पुलिस में दो आधुनिक ड्रोन शामिल: 5 किमी तक निगरानी, भीड़ नियंत्रण में मिलेगी मदद – durg-bhilai News

By adminNovember 12, 2025No Comments4 Mins Read
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दुर्ग पुलिस लाइन में दो आधुनिक ड्रोन का परीक्षण किया गया, जिससे दुर्ग पुलिस ने स्मार्ट और हाई-टेक पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में दुर्ग संभवतः पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां पुलिस के पास अपनी समर्पित ड्

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छोटे और मध्यम श्रेणी के ये दोनों ड्रोन अब जिले की निगरानी, भीड़ नियंत्रण, यातायात निगरानी, तलाशी अभियान और आपदा के समय तैनात किए जा सकेंगे।

पुलिस के अनुसार, इन ड्रोन में कई प्रमुख क्षमताएं और विशिष्टताएं हैं। इनकी निगरानी सीमा लाइव वीडियो के लिए 5 किलोमीटर तक है, जो बैटरी और मॉडल के आधार पर 5 से 15 किलोमीटर तक हो सकती है।

इनमें 4K रेजोल्यूशन वाला जूमिंग लेंस कैमरा लगा है, जिससे ऊंचाई से भीड़ और गतिविधियों की स्पष्ट निगरानी की जा सकेगी। इनकी उड़ान का समय 25 से 30 मिनट है, जो बैटरी के प्रकार पर निर्भर करता है, कुछ मॉडलों में यह क्षमता 30 से 55 मिनट तक भी हो सकती है।

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25 किलो सामान उठा लेगा ड्रोन

ड्रोन की पेलोड क्षमता लगभग 25 किलोग्राम तक सामान ले जाने की है, जिसमें ड्रॉपिंग मैकेनिज्म और ग्रेनेड/सर्चलाइट माउंटिंग की संभावना भी है। ये पूरी तरह से स्वायत्त (ऑटोनॉमस) और मैनुअल नियंत्रण दोनों मोड में संचालित हो सकते हैं।

इनमें कम शोर सिग्नेचर और पॉइंट-टू-पॉइंट एन्क्रिप्टेड संचार की सुविधा भी है। सुरक्षा के लिए, कम बैटरी या संचार हानि होने पर ये स्वतः वापस लौटने (रिटर्न-टू-होम) की क्षमता रखते हैं। इनकी IP65 पैकिंग है और ये -10°C से +50°C तक के तापमान में काम कर सकते हैं।

इन ड्रोनों में दिन-रात संचालन की सुविधा भी है, जिसमें 4K कैमरे के साथ विकल्प-2 में नाइट विजन/थर्मल (640×512) उपलब्ध है। अधिकारियों ने बताया कि इन ड्रोनों से न केवल भीड़-प्रबंधन और यातायात निगरानी में मदद मिलेगी, बल्कि भागते हुए संदिग्धों की तलाश, हादसों में मृत शरीर की खोज, आपदा के समय राहत सामग्री गिराने और संवेदनशील इलाकों की दूरस्थ निगरानी में भी ये सहायक होंगे।

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आईजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि इन ड्रोन का मूल उद्देश्य अग्रिम टीम भेजने से पहले स्थितियों की निगरानी करना, भीड़ नियंत्रण के दौरान संदिग्धों की पहचान करना और अपराध नियंत्रण को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से अपराध की रोकथाम और घटना-आधारित अपराधों का पता लगाने में मदद मिलेगी।

ड्रोन के प्रदर्शन के दौरान दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग, एसपी विजय अग्रवाल, लाइन डीएसपी चंद्रप्रकाश तिवारी, एस.आई. डॉ. संकल्प रॉय, रक्षित निरीक्षक नीलकंठ वर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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एंटी-ड्रोन ट्रेनिंग — खतरे से निपटने की तैयारीड्रोन-एकीकरण के साथ ही दुर्ग के वरिष्ठ अफसरों ने हाल ही में एंटी-ड्रोन तकनीक में भी ट्रेनिंग ली है। आईआईटी रोपड़ और बीपीआरडी द्वारा पंजाब में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण में दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग भी शामिल रहे। प्रशिक्षण में न केवल संदिग्ध ड्रोन की पहचान करना सिखाया गया, बल्कि उसकी फ्रीक्वेंसी पता कर उसे निष्क्रिय करने, कंट्रोल-लिंक काटने और आवश्यक होने पर ड्रोन पर डायरेक्ट एक्शन लेने की तकनीकें भी सिखाई गईं।प्रशिक्षित अफसरों में एसपी (दंतेवाड़ा) गौरव राय, कमांडेंट उदय किरण और राज्य इंटेलिजेंस विंग के एएसपी रोहित झा भी शामिल रहे। अधिकारियों ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संदिग्ध ड्रोन की पहचान व उसे बेअसर करने के लिये यह टेक्नोलॉजी बेहद उपयोगी होगी। संभावित तौर पर दुर्ग रेंज में एक ड्रोन यूनिट खोलने का प्रस्ताव भी है, ताकि संवेदनशील ऑपरेशनों में त्वरित तैनाती संभव हो।प्रभाव और आगे की योजनापुलिस अधिकारियों का मानना है कि ड्रोन तकनीक अपराध-निगरानी और प्रतिक्रिया समय दोनों को बेहतर करेगी। भीड़ एवं बड़े-इवेंट्स की निगरानी से पहले-पहले संदिग्धों की पहचान कर समय पर कार्रवाई संभव होगी। वहीं, दूरदराज़ इलाकों में खोज-बीन और आपदा प्रबंधन में भी ड्रोन का उपयोग फायदेमंद साबित होगा। साथ ही एंटी-ड्रोन काबिलियत संवेदनशील स्थलों जैसे हवाई अड्डे, सैन्य ठिकाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगी।दुर्ग पुलिस के इस कदम को स्थानीय सुरक्षा तंत्र में एक नया अध्याय माना जा रहा है — जहां पारंपरिक पेट्रोलिंग और जमीन-आधारित जांच के साथ-साथ हाई-टेक निगरानी भी जुड़कर जन सुरक्षा को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।



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