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जिले के केशकाल ब्लॉक के दूरस्थ पहाड़ी अंचल में बसे नंद गट्टा गांव के आदिवासी ग्रामीणों ने वह कर दिखाया है, जो कभी बिहार के दशरथ मांझी ने किया था। शासन-प्रशासन की उपेक्षा से तंग आकर ग्रामीणों ने अब स्वयं पहाड़ काटकर सड़क बनाने का बीड़ा उठाया है। ग्राम पंचायत होनेहेड़ अंतर्गत आने वाला यह गांव ब्लाक मुख्यालय केशकाल से करीब 45 से 50 किलोमीटर दूर बसा है।
आज़ादी के 79 साल बाद भी यहां तक पक्की सड़क नहीं पहुंची। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क तो कुएंमारी तक बनी, लेकिन कुएंमारी से नंद गट्टा तक का लगभग 5 से 10 किलोमीटर का रास्ता आज भी दुर्गम पहाड़ियों और कंटीली झाड़ियों से होकर गुजरता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है।
किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में ग्रामीणों को डोला बनाकर कई किलोमीटर तक पैदल सफर करना पड़ता है। कई बार सरपंच, विधायक को आवेदन देने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने तय किया कि अब अपने बलबूते पर ही सड़क बनाएंगे। गांव में सार्वजनिक बैठक कर यह निर्णय लिया गया कि हर परिवार से दो से तीन सदस्य प्रतिदिन श्रमदान देंगे।
पिछले डेढ़ महीने से पुरुष, महिलाएं और युवा मिलकर फावड़ा, कुदाल, कुल्हाड़ी और साबल लेकर पहाड़ की चट्टानें काट रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे यह काम केवल सड़क बनाने के लिए नहीं, बल्कि सरकार को संदेश देने के लिए भी कर रहे हैं कि अगर इच्छा शक्ति और एकजुटता हो तो सीमित संसाधनों में भी विकास का रास्ता खुद तैयार किया जा सकता है। इस जनसहभागिता से शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का विषय बन गया है।
जानकारी मिली है ,सहयोग दिया जाएगा: सीईओ सिन्हा जनपद पंचायत केशकाल के सीईओ अनुराग सिन्हा ने बताया मेरी जानकारी में आया है कि ग्रामीण श्रमदान कर सड़क बना रहे हैं यह इलाका अत्यंत दुर्गम है। पंचायत को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए सहयोग दिया जाएगा।
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