गरियाबंद जिले में 116 शौचालयों के निर्माण में लापरवाही का आरोप है। दुर्ग की एक ठेका कंपनी को 1 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से शौचालय निर्माण का ठेका दिया गया था। आरोप है कि कंपनी को 6 महीने पहले 61 लाख रुपए की अग्रिम राशि जारी की गई थी।
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इसके तहत 90 दिनों में काम पूरा करना था। आरोप है कि अब तक 50 शौचालयों का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है। जानकारी के मुताबिक, यह ठेका जुलाई महीने में दुर्ग की कंचन कंस्ट्रक्शन को दिया गया था। कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार, कंपनी को 90 दिनों के भीतर सभी 116 शौचालयों का निर्माण पूरा करना था।
लेकिन, निर्धारित समय-सीमा बीत जाने और 6 महीने से अधिक का समय हो जाने के बावजूद भी काम की प्रगति संतोषजनक नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि फर्म कर काम लेगी। शुरुआत में स्कूल शिक्षा विभाग ने फरवरी 2025 में जिले के 5 ब्लॉक के स्कूलों के लिए 116 शौचालयों के निर्माण को वित्तीय मंजूरी दी थी।
प्रत्येक शौचालय 1 लाख 3 हजार रुपए की लागत से बनाया जाना था। बाद में कलेक्टर के अनुमोदन पर यह काम आदिवासी विकास विभाग को सौंप दिया गया।

कलेक्टर के निर्देश पर जारी किया गया काम
विभाग के पास पहले से ही 2 साल से ‘स्कूल जतन’ योजना के तहत भवन निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी है। अधिकारियों का कहना है कि शौचालय जैसे छोटे काम पंचायतों को भी दिए जा सकते थे। प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन भगत ने बताया कि यह काम कलेक्टर के निर्देश पर जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि काम की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाती है, तो कलेक्टर से मार्गदर्शन लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी। ट्राइबल विभाग के पास पहले से 18 करोड़ के निर्माण कार्य लंबित थे। इन कार्यों में पहले ही विलंब हो रहा था, इसके बावजूद विभाग को ही एजेंसी बनाया गया।

सरपंच संघ ने लगाया उपेक्षा का आरोप
तय नियमों के अनुसार 20 लाख तक के निर्माण कार्य सरपंचों को दिए जा सकते हैं, लेकिन नए सत्र में सरपंचों के हाथ में काम न के बराबर है। सरपंच संघ के अध्यक्ष पन्ना लाल ध्रुव ने कहा कि अपने गांव के बच्चों के लिए संसाधन स्थानीय सरपंच बाहरी ठेकेदारों से बेहतर बना सकते हैं।
लेकिन प्रशासन लगातार सरपंचों की उपेक्षा कर रहा है। बता दें कि तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के सरपंचों ने 28 नवंबर को धरना-प्रदर्शन भी किया था।
देवभोग के 20 कामों में एक भी शुरू नहीं
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 116 शौचालयों में से 28 मैनपुर, 26 गरियाबंद, 8 फिंगेश्वर, 33 छूरा और 20 देवभोग ब्लॉक में मंजूर किए गए हैं। देवभोग के 20 शौचालयों सहित जिले के 60 से अधिक शौचालयों का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है।
कहा जा रहा है कि जिले भर में फैले इन कामों के लिए अलग-अलग फर्मों को काम देने के बजाय दुर्ग की एक ही फर्म को ठेका दे दिया गया। संसाधनों के अभाव और जिले के एक प्रमुख अफसर के संरक्षण के कारण ठेकेदार मनमानी कर रहा है और काम शुरू नहीं कर रहा।
कलेक्टर बोले- फर्म कर लेगी काम
कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने कहा कि “जिस फर्म को काम दिया गया है, वह काम कर लेगी। मैंने अभी इसका फॉलो-अप नहीं लिया है। रिपोर्ट लेता हूं। अगर काम नहीं हो रहा है तो एजेंसी पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
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