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कांग्रेस के एमसीबी जिलाध्यक्ष के रूप में दूसरी बार नियुक्ति के पहले दिन ही अशोक श्रीवास्तव के नेतृत्व में पार्टी ने एक बड़ा आंदोलन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पुतला दहन कर राज्य सरकार की नीतियों का विरोध किया गया।
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कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ओर से गाइडलाइन दरों में 10 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक की वृद्धि, 5 डिसमिल से कम भूमि की रजिस्ट्री पर रोक, रजिस्ट्री शुल्क में बढ़ोतरी और अन्य टैक्स वृद्धि के निर्णयों ने जिले के किसानों, गरीबों, मजदूरों, युवाओं और रियल एस्टेट सेक्टर पर बड़ा आर्थिक बोझ डाल दिया है।
जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ
जिला कांग्रेस कमेटी ने इन निर्णयों की कड़ी निंदा की है। जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने अपने आर्थिक कुप्रबंधन का पूरा भार जनता पर डाल दिया है। गाइडलाइन बढ़ने से जमीन, मकान और दुकान खरीदना असंभव हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे प्लॉट की रजिस्ट्री रोककर गरीबों का घर छीनने का काम हो रहा है और भाजपा सरकार पूरी तरह जनविरोधी नीतियों पर चल रही है।
किसानों-आदिवासियों पर सीधा असर
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस फैसले को सीधे तौर पर किसान और आदिवासी समाज पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की गाइडलाइन अनाप-शनाप बढ़ाकर किसानों को उनकी अपनी जमीन से दूर किया जा रहा है। कृषि भूमि की बढ़ी हुई सरकारी दरें किसानों के लिए भारी संकट बन जाएंगी।
निर्माण ठप, बेरोजगारी बढ़ने की आशंका
एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे ने कहा कि गाइडलाइन और रजिस्ट्री शुल्क बढ़ने से निर्माण कार्य रुकेंगे और बेरोजगारी तेजी से बढ़ेगी। लाखों मजदूर और युवा इससे प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार देने की बजाय रोजगार छीनने का काम कर रही है, और यह निर्णय युवाओं के भविष्य के खिलाफ है।
जमीन दरों में भारी बढ़ोतरी से संकट
जिला प्रवक्ता सौरव मिश्रा ने बताया कि भाजपा सरकार बनने के बाद एक साल में जमीनों की सरकारी दरें 40 प्रतिशत से 500 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह निर्णय प्रदेश को आर्थिक मंदी की ओर धकेल देगा, आम जनता के लिए घर-दुकान बनाना मुश्किल हो जाएगा और छोटे व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाएंगे।
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